गाजीपुर : भले ही जिलाधिकारी बनने के लिए यूपीएससी क्वालीफाई करना पड़ता है लेकिन गाजीपुर में आज एक दिन के लिए बगैर यूपीएससी क्वालीफाई किए ही एक छात्रा गाजीपुर की जिलाधिकारी बनी। जिलाधिकारी बनने के बाद उसने जनता दर्शन में आए फरियादियों की कई समस्याओं को सुना और उन समस्याओं के निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश भी दिए। यह सब कुछ हो पाया है उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा संचालित मिशन शक्ति के तहत।
गाजीपुर के जिला अधिकारी कार्यालय में जिला अधिकारी के कुर्सी के बगल में बैठी यह गंगा मौर्या है, जो साल 2025 में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के द्वारा हाई स्कूल की परीक्षा में प्रदेश में सातवां स्थान पाकर टॉप 10 में अपना स्थान बनाया था। आज प्रदेश सरकार के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में मिशन शक्ति 5.0 के तहत एक दिन के लिए जिलाधिकारी बनाने का कार्यक्रम चला और इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और नारी समाज को सम्मान देना था।
एक पद नहीं बल्कि जिम्मेदारियों से भरी हुई कुर्सी है
इसी के क्रम में लूदर्स कॉन्वेंट स्कूल तुलसीसागर की छात्र गंगा मौर्य आज मिशन शक्ति 5.0 के तहत एक दिन के लिए जिलाधिकारी बनी और जिलाधिकारी बनने के बाद उसे समझ में आया कि यह सिर्फ एक पद नहीं बल्कि जिम्मेदारियों से भरी हुई कुर्सी है। इसीलिए यूपीएससी क्वालीफाई लोगों को ही यह पद मिल पाता है क्योंकि उसने महसूस किया कि उसके सामने कई जमीनी विवाद के साथ ही LPG से संबंधित और अन्य कई तरह के मामले सामने आए जिसे जिला अधिकारी ने गंगा मौर्य को समझाते हुए चुटकियों में हल करने का काम किया, जिसके बाद फरियादी संतुष्ट होकर वापस गए।
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कागज़ों पर लिख-लिख कर बताते रहे टिप्स
गंगा मौर्य ने बताया कि आज जब उसे जानकारी हुआ कि उसे 1 दिन के लिए जिलाधिकारी बनाया जाएगा तब उसके खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वह इस कुर्सी पर बैठने से पहले कई तरह के सोच अपने जेहन में उतारा था और फिर कुर्सी पर बैठते ही उसे महसूस हुआ कि यह सिर्फ कुर्सी नहीं बल्कि जिम्मेदारियां वाली कुर्सी है। क्योंकि यहां पर पूरे जिले के लोग जो अपने-अपने समस्याओं को लेकर आते हैं और उसे एकमात्र व्यक्ति जो जिलाधिकारी के रूप में बैठा होता है उसे निस्तारण करने के साथ ही सामने वाले व्यक्ति को निराश भी नहीं करना होता है। जिलाधिकारी ने गंगा मौर्य को अन्य कई तरह के टिप्स भी काग़ज़ों पर लिख-लिख कर बताते रहे और गंगा मौर्य उसे बड़े मनोयोग से देखते रही।
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