UP: गोरखपुर के चिलुआताल इलाके में किराए के मकान से चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने विदेशों (मुख्य रूप से अमेरिका) में रहने वाले लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस के नाम पर ठगने का धंधा करीब छह महीने से चला रखा था। पुलिस ने छह युवकों को हिरासत में लिया है और शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को मामले का विस्तृत खुलासा करने की तैयारी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इस कॉल सेंटर में 10 से 15 युवक-युवतियां काम कर रहे थे।
गिरोह कैसे काम करता था?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरोह के सदस्य विदेशी नागरिकों को फोन कर खुद को अमेरिकी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी का प्रतिनिधि बताते थे। वे झांसे में लेकर मेडिकल क्लेम, रिफंड या पॉलिसी अपडेट के नाम पर पैसे मांगते थे। ठगी की रकम विभिन्न डिजिटल वॉलेट, UPI, बैंक खातों और क्रिप्टो माध्यमों से एकत्र की जाती थी। फर्जी खाते और मनी म्यूल्स के जरिए रकम को जल्दी ट्रांसफर कर दिया जाता था ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो। सरगना ने चिलुआताल के करीमनगर इलाके में किराए का मकान लेकर यह सेटअप बनाया था।
पकड़े गए आरोपितों का बैकग्राउंड
- हिरासत में लिए गए युवक मुख्य रूप से गोरखपुर, लखनऊ और आसपास के जिलों के निवासी हैं।
- एक आरोपी पहले भी लखनऊ में इसी तरह के कॉल सेंटर फ्रॉड के मामले में जेल जा चुका है। उसे एक वर्ष पहले जेल भेजा गया था, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद फिर सक्रिय हो गया।
- इससे पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह पुराना और संगठित आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें कई सदस्य जेल-जमानत का चक्र चला रहे हैं।
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छापेमारी में क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण सामान जब्त किए:
- 10 से अधिक लैपटॉप और कंप्यूटर
- दर्जनों मोबाइल फोन
- सैकड़ों सिम कार्ड (ज्यादातर फर्जी या दूसरे नाम पर रजिस्टर्ड)
- वॉइस चेंजर ऐप, स्क्रिप्ट और कॉलिंग सॉफ्टवेयर
- अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
पुलिस अब इन डिवाइसों से कॉल डाटा, चैट लॉग, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और इंटरनेशनल कॉल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या कॉल सेंटर के लिए कोई वैध BPO लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन था। मकान मालिक से भी पूछताछ हो रही है कि क्या उसे किराएदारों की अवैध गतिविधियों की जानकारी थी।
पुलिस की जांच के प्रमुख बिंदु
- ठगी की कुल रकम का अनुमान और कहां-कहां ट्रांसफर हुई।
- विदेशी पीड़ितों की संख्या और उनके बयान दर्ज करने की प्रक्रिया (INTERPOL या संबंधित देशों के साथ समन्वय संभव)।
- गिरोह के अन्य सदस्यों और सरगना की तलाश।
- क्या यह नेटवर्क अन्य शहरों (जैसे लखनऊ, कानपुर, दिल्ली) में भी फैला है।
- युवक-युवतियों को कैसे भर्ती किया जाता था और क्या वे जानबूझकर ठगी में शामिल थे या धोखे में फंसे थे।
शुक्रवार को संभावित खुलासा
चिलुआताल पुलिस का कहना है कि हिरासत में पूछताछ पूरी होने के बाद शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले का विस्तृत खुलासा किया जाएगा। पुलिस को उम्मीद है कि जांच के दौरान बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय ठगी का नेटवर्क उजागर होगा और कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह मामला उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर फ्रॉड और फर्जी कॉल सेंटरों के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई का हिस्सा है।














































