उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के सिकरीगंज (जद्दूपट्टी) स्थित न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में 1 फरवरी 2026 को आयोजित आई कैंप के दौरान मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण फैलने का मामला बेहद दर्दनाक साबित हुआ है। लगभग 30 मरीजों की सर्जरी हुई, जिनमें से 18-22 मरीजों में संक्रमण फैला। अब तक कम से कम 9-14 मरीजों ने अपनी आंखों की रोशनी गंवा दी है, जबकि कई की आंखें निकालनी पड़ीं ताकि संक्रमण आगे न फैले। कई मरीजों को दिल्ली AIIMS, लखनऊ और वाराणसी के अस्पतालों में रेफर किया गया। जिलाधिकारी दीपक मीणा के आदेश पर मजिस्ट्रियल जांच पूरी हो गई है। जांच रिपोर्ट में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में संक्रमण और लापरवाही की स्पष्ट पुष्टि हुई है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन सहदेव मिश्र ने डीएम को रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने की मजबूत संस्तुति की गई है। अस्पताल पहले से सील है, और नेत्र विभाग पर ताला लगा हुआ है।
घटना का विवरण और संक्रमण का फैलाव
1 फरवरी को अस्पताल में फ्री आई कैंप (कुछ सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत) लगाया गया था, जहां 30 मरीजों की मोतियाबिंद सर्जरी हुई। सर्जरी के 24 घंटे के भीतर ही मरीजों की आंखों में दर्द, सूजन, पस और खून आने जैसे लक्षण दिखे। स्वास्थ्य विभाग की कल्चर रिपोर्ट में बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि हुई। संक्रमण इतना गंभीर था कि 18 मरीजों की स्थिति बिगड़ गई, और उन्हें उच्च केंद्रों पर रेफर करना पड़ा। अब तक की रिपोर्ट्स के अनुसार:
9-10 मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं।
9-14 मरीजों ने पूरी तरह रोशनी गंवा दी (कुछ में आंशिक सुधार की खबरें भी हैं)।
संक्रमण का मुख्य कारण ओटी की अस्वच्छता, साफ-सफाई में लापरवाही और संभवतः स्टेराइल उपकरणों का अभाव बताया जा रहा है। यह घटना “आंखफोड़वा अस्पताल” के रूप में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, जहां लोग अस्पताल की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।
मजिस्ट्रियल जांच और रिपोर्ट की मुख्य बातें
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने 12-13 फरवरी को मामले की मजिस्ट्रियल जांच का आदेश दिया था, जिसमें एडीएम प्रशासन सहदेव मिश्र की टीम ने जांच की। जांच में:
ओटी में बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि।
सर्जरी प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही (स्टेरिलाइजेशन, साफ-सफाई और प्रोटोकॉल का उल्लंघन)।
अस्पताल संचालक और डॉक्टरों की जिम्मेदारी तय की गई।
रिपोर्ट में अस्पताल का लाइसेंस तत्काल निरस्त करने की सिफारिश की गई है। जांच टीम ने मरीजों, परिजनों और अस्पताल स्टाफ के बयान दर्ज किए। स्वास्थ्य विभाग की अलग जांच भी चल रही थी, जिसमें कल्चर टेस्ट से संक्रमण साबित हुआ। डीएम ने अस्पताल सील कराने के साथ FIR दर्ज कराने और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंस रद्द होने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
प्रभावित मरीजों की स्थिति और आगे की कार्रवाई
प्रभावित मरीज ज्यादातर बुजुर्ग हैं, जो रोशनी खोने के सदमे में हैं। कई परिवार आर्थिक तंगी और भावनात्मक आघात से जूझ रहे हैं। प्रशासन ने मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया है, लेकिन कई मामलों में आंखें निकालने के बाद स्थायी अंधापन हो गया है।
पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई जारी।
संभवतः मेडिकल नेग्लिजेंस के तहत IPC की धाराओं (जैसे 304A – लापरवाही से मौत/क्षति) के साथ मुकदमा।
अस्पताल के खिलाफ मुआवजा और अन्य राहत की मांग उठ रही है।
यह घटना निजी अस्पतालों में सर्जरी कैंपों की मॉनिटरिंग और स्टैंडर्ड्स पर सवाल खड़े करती है। गोरखपुर में पहले भी BRD मेडिकल कॉलेज जैसे मामलों के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं पर सख्ती की जरूरत दोहराई जा रही है।
INPUT-ANANYA MISHRA









































