गोरखपुर : शिवपुर, वार्ड संख्या 70 निवासी स्वर्ण व्यवसायी पारसनाथ वर्मा (64 वर्ष) के निधन के बाद उनकी सात बेटियों ने सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए पिता का अंतिम संस्कार स्वयं किया। गुरुवार को लखनऊ के एक निजी अस्पताल में गंभीर बीमारी के बाद उनका निधन हो गया था।
पिता की अंतिम यात्रा में बेटियों ने ही सारी जिम्मेदारी संभाली। सबसे बड़ी बेटी अंजू वर्मा ने राजघाट पर पिता को मुखाग्नि दी, जो परंपरागत रूप से बेटों का कर्तव्य माना जाता है।
बेटियों का संकल्प
पारसनाथ वर्मा की सातों बेटियां पिता के अंतिम संस्कार में पूरी तरह सक्रिय रहीं। उन्होंने शव यात्रा से लेकर राजघाट पर अंतिम संस्कार तक की सारी रस्में स्वयं निभाईं। इस दौरान बेटियों ने कहा कि पिता ने उन्हें हमेशा बेटे की तरह बड़ा किया और उन्हें हर अधिकार दिया। इसलिए आज पिता के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी वे ही निभा रही हैं।
समाज में सकारात्मक संदेश
यह घटना गोरखपुर में बेटियों द्वारा पिता का अंतिम संस्कार करने का एक अनूठा उदाहरण बन गई है। स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने बेटियों के इस साहसिक कदम की सराहना की है। कई लोगों ने कहा कि यह घटना समाज में बेटी और बेटे में भेदभाव की दीवार को तोड़ने का संदेश देती है।
पारसनाथ वर्मा स्वर्ण व्यवसायी थे और इलाके में सम्मानित व्यक्ति माने जाते थे। उनके निधन से परिवार और समाज में शोक की लहर है, लेकिन बेटियों द्वारा निभाई गई जिम्मेदारी को लोग प्रेरणादायक बता रहे हैं।
यह घटना उत्तर प्रदेश में बेटियों को समान अधिकार देने और पारंपरिक रूढ़ियों को चुनौती देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है।
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