केंद्र सरकार ने उन खबरों पर जवाब दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि अगर ग्राहकों ने e-KYC नहीं कराया, तो उनका गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि eKYC की जरूरत सिर्फ उन्हीं ग्राहकों को है, जिनका वेरिफिकेशन अब तक नहीं हुआ है।सरकार ने कहा कि यह कोई नया नियम नहीं है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जो जानकारी दी है, वह पुराने अभियान का ही हिस्सा है। इसका मकसद सिर्फ इतना है कि ज्यादा से ज्यादा गैस ग्राहक अपना बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करवा लें, ताकि सिस्टम में फर्जीवाड़ा न हो।
यदि आप एक सामान्य एलपीजी ग्राहक हैं और आपने पहले अपना eKYC करवा लिया है, तो आपको यह प्रक्रिया दोबारा करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। यह नियम सिर्फ उन लोगों पर लागू होता है जिनका रिकॉर्ड अब तक अपडेट नहीं हुआ है।उज्ज्वला योजना के ग्राहकों के लिए नियम थोड़े अलग है। इन ग्राहकों को हर वित्तीय वर्ष में कम से कम एक बार बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कराना होता है। यह वेरिफिकेशन भी सिर्फ उन उज्ज्वला ग्राहकों के लिए आवश्यक है जो साल में 7 सिलेंडर लेने के बाद 8वें और 9वें रिफिल पर मिलने वाली टारगेटेड DBT सब्सिडी का लाभ उठाना चाहते हैं।
घर बैठे कर सकते हैं eKYC
ग्राहकों को बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के लिए गैस एजेंसी जाने की जरूरत नहीं है। मंत्रालय ने बताया कि eKYC की प्रक्रिया घर बैठे आसानी से और मुफ्त में पूरी की जा सकती है। ग्राहक संबंधित गैस कंपनी के मोबाइल एप के जरिए इसे खुद ही पूरा कर सकते हैं। eKYC के लिए सिर्फ ‘आधार कार्ड’ और ‘रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर’ की ही आवश्यकता होती है।
फर्जी ग्राहकों और कालाबाजारी पर लगाम लगेगी
सरकार का कहना है कि eKYC कराने का मुख्य उद्देश्य सिस्टम में पारदर्शिता लाना है। इससे ‘घोस्ट कंज्यूमर्स’ यानी उन फर्जी गैस कनेक्शनों को हटाने में मदद मिलती है जो किसी और के नाम पर चल रहे हैं। इसके अलावा इससे एलपीजी की कालाबाजारी रोकने में भी मदद मिलेगी।
असल में कानून क्या कहता है?
सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के मुताबिक, सरकार सिर्फ उन्हीं सेवाओं या फायदों के लिए आधार अनिवार्य कर सकती है, जहां पैसा सीधे सब्सिडी के रूप में दिया जा रहा हो। गैस कनेक्शन अपने आप में कोई सब्सिडी नहीं है। कोई भी बाजार भाव पर कनेक्शन ले सकता है और करोड़ों लोग बिना किसी सरकारी मदद के पूरी कीमत चुकाकर गैस खरीदते हैं। ऐसे लोगों के लिए आधार बायोमेट्रिक अनिवार्य करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। कानून कहता है कि e-KYC सिर्फ उनके लिए जरूरी है जो ‘उज्ज्वला’ या ‘पहल’ स्कीम के तहत सब्सिडी लेते हैं। बाकी सबके लिए यह अपनी मर्जी पर है।
INPUT-ANANYA MISHRA















































