हापुड़ (Hapur) में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) निवेश के नाम पर एक व्यक्ति से 50.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी (Fraud) का मामला सामने आया है। धोखेबाजों ने व्हाट्सऐप कॉल पर जाल बिछाया, फर्जी लिंक भेजकर निवेश के नाम पर अकाउंट बनवाया और कई खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर करा लिए। निवेश के नाम पर दिखाया गया बिटकॉइन इंटरफेस अचानक गायब हो गया। पीड़ित व्यक्ति ने थाने में तहरीर देकर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। पुलिस जांच में जुटी है।
कैसे हुई धोखाधड़ी?
पीड़ित व्यक्ति को व्हाट्सऐप पर एक कॉल आई, जिसमें धोखेबाजों ने खुद को क्रिप्टो निवेश विशेषज्ञ बताया। उन्होंने कहा कि क्रिप्टो में निवेश करने से कम समय में दोगुना-तिगुना मुनाफा हो सकता है। पीड़ित को एक लिंक भेजा गया, जिस पर क्लिक करने के बाद एक फर्जी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म खुला। लिंक के जरिए पीड़ित ने अपना बैंक अकाउंट लिंक किया और निवेश के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने शुरू कर दिए।पहले छोटी रकम ट्रांसफर कराई गई, जिसके बाद फर्जी ऐप में मुनाफा दिखाया गया। लालच में पीड़ित ने कुल 50.50 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए। ट्रांसफर के बाद ऐप में दिखने वाला बिटकॉइन बैलेंस और प्रॉफिट अचानक गायब हो गया। जब पीड़ित ने संपर्क करने की कोशिश की तो धोखेबाजों का नंबर बंद मिला।
पीड़ित ने थाने में दी तहरीर
पीड़ित व्यक्ति ने हापुड़ के संबंधित थाने में तहरीर देकर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। तहरीर में बताया गया कि धोखेबाजों ने फर्जी ऐप और लिंक के जरिए बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर कराए। पुलिस ने आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 467 (फर्जी दस्तावेज), 468 (फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल), 471 (फर्जी दस्तावेज को असली दिखाना) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस जांच की स्थिति
पुलिस ने पीड़ित के बैंक खातों से हुए ट्रांसफर की जांच शुरू कर दी है। ट्रांसफर हुए खातों की डिटेल्स जुटाई जा रही हैं। साइबर सेल को मामले की जांच सौंपी गई है ताकि धोखेबाजों के आईपी एड्रेस, मोबाइल नंबर और फर्जी ऐप का पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि धोखेबाजों का नेटवर्क बड़ा हो सकता है और जल्द ही गिरफ्तारियां होंगी।
क्रिप्टो धोखाधड़ी के बढ़ते मामले
हापुड़ और आसपास के जिलों में पिछले कुछ महीनों में क्रिप्टो निवेश के नाम पर धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। धोखेबाज फर्जी ऐप और लिंक के जरिए लोगों को जाल में फंसाते हैं और लाखों-करोड़ों रुपये ऐंठ लेते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि क्रिप्टो निवेश से पहले पूरी जांच करें और किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।







































