पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को सवालों के घेरे में खड़ा किया गया है। सीएम ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। याचिका में इस प्रक्रिया को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताया गया है और कहा गया है कि इसका सीधा असर निष्पक्ष चुनाव पर पड़ सकता है।
मामला क्या है
सुप्रीम कोर्ट बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के खिलाफ याचिका पर सुनवाई होनी है। सुनवाई के लिए ममता सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के बाहर बड़ी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात है। बंगाल CM ने अपनी याचिका में बंगाल में चल रहे SIR के तहत वोटर लिस्ट संशोधन को चुनौती दी है। उनका आरोप है कि बंगाल में चल रहा SIR मनमाना है, और चुनावों से पहले बड़े पैमाने पर मतदाताओं को बाहर किए जाने का खतरा है।ममता की मांग है कि 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पुरानी सूची के आधार पर ही कराए जाएं।
आज की सुनवाई का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ममता बनर्जी ने सोमवार को पहले नई दिल्ली में ईसीआई मुख्यालय में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलकर एसआईआर पर आपत्तियां जताई थीं। बैठक के बाद, मुख्यमंत्री ने सीईसी पर तीखे आरोप लगाए, उन्हें ‘घमंडी’ बताया और उन पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर पश्चिम बंगाल को निशाना बनाने का आरोप लगाया। बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया था कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से असली मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाए गए हैं और दावा किया था कि रिवीजन प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष चुनावी रोल ऑब्जर्वर और माइक्रो-ऑब्जर्वर सिर्फ पश्चिम बंगाल के लिए नियुक्त किए गए हैं।
ममता बनर्जी के सुप्रीम कोर्ट में आरोप
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसे बिना पर्याप्त परामर्श व स्पष्ट दिशा-निर्देशों के लागू किया जा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह की प्रक्रिया से आम नागरिकों में भ्रम और भय का माहौल बन रहा है। अपनी याचिका में सीएम ममता ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात और तानाशाही रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि जिस संवैधानिक संस्था से निष्पक्षता, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की अपेक्षा की जाती है, वही संस्था अब ऐसे स्तर पर पहुंच गई है, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए बेहद चिंताजनक है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कर सकती है सुनवाई
सूत्रों के मुताबिक, LLB डिग्री होल्डर ममता कोर्ट में खुद अपनी दलीलें भी रख सकती हैं। मामला CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच में है।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दाखिल की है, उस पर वह खुद बहस करने जा रही हैं। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर बहस करने की अनुमति मांगने के लिए एक अंतरिम आवेदन दायर किया था। वह अपने वकीलों के साथ खुद सुप्रीम कोर्ट के रूम नंबर 1 में मौजूद रहेंगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नाम से सुप्रीम कोर्ट ने पास भी जारी किया है।
INPUT-ANANYA MISHRA













































