अपर्णा और प्रतीक का तलाक हुआ तो बीजेपी अपर्णा से कैसे निभाएगी अपनी दोस्ती?

19 जनवरी 2026 से मुलायम सिंह यादव के परिवार में नया संग्राम छिड़ता दिख रहा है। प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी अपर्णा यादव को तलाक देने का ऐलान किया है. प्रतीक यादव ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर करते हुए अपनी पत्नी अपर्णा यादव से तलाक लेने की बात कही। इस पोस्ट में प्रतीक यादव ने कहा कि वह जल्द से जल्द इस रिश्ते को खत्म करना चाहते हैं.। उन्होंने अपनी पत्नी पर परिवारिक रिश्ते खराब करने और बस अपनी प्रसिद्धि व प्रभाव बढ़ाने पर ध्यान देने का आरोप लगाया है। लेकिन इस पूरे विवाद के बाद क्या बीजेपी अपर्णा यादव का साथ देगी या नहीं ये सवाल इस वक्त अब सभी के मन में चल रहे है।और ये सवाल सभी के दिमाग में चलना इसलिए भी लाजमी है क्योंकि अपर्णा भले ही समाजवादी पार्टी के घराने की है यानी मुलायम सिंह की छोटी बहू है,लेकिन वो इस वक्त बीजेपी में शामिल है। इस लिए अपर्णा और प्रतीक यादव की तलाक खबर सुर्खिया बन जाती है।

भाजपा अपर्णा का क्या देगी साथ?

राजनीतिक विश्लेषकों की राय-राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं की अपर्णा और प्रतीक यादव अगर शादी तोड़ते हैं, तो इसका सीधा असर अपर्णा के राजनीतिक जीवन पर भी पड़ेगा। अगर उनका यादव परिवार से रिश्ता टूटा, तो भाजपा सपा के खिलाफ उन्हें चेहरा नहीं बना सकेगी। पार्टी के अंदर भी उनके विरोधी मुद्दा बनाएंगे। कहेंगे कि जब अपर्णा का यादव परिवार से कोई संबंध नहीं रहा, तो उन्हें चेहरा क्यों बनाया जाए? वैसे भी भाजपा में अपर्णा का फ्यूचर ज्यादा उज्ज्वल नजर नहीं आता, क्योंकि वह जननेता नहीं हैं। बतौर नेता उनकी छवि अपीलिंग भी नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का दूसरा वर्ग – राजनीति के जानकारों का दूसरा वर्ग मानता है कि अपर्णा को महिलाओं की सहानुभूति दिलाने के लिए इसे मुद्दा बनाया जा सकता है। पार्टी रणनीतिक रूप से प्रतीक पर हमलावर हो सकती है कि उन्होंने किस तरह सोशल मीडिया पर अपनी पत्नी को बदनाम करने वाली पोस्ट की? इसकी आड़ में पार्टी सपा को घेर भी सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो वह एक बार फिर अपर्णा का सैफई के यादव परिवार के खिलाफ उपयोग कर सकती है।

आखिरकार बीजेपी में अपर्णा को बड़ा स्थान क्यों नहीं मिला?

अपर्णा ने 2023 में लखनऊ नगर निगम चुनाव में महापौर पद के लिए दावेदारी की थी। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक RSS और भाजपा के कई नेता उनकी पैरवी कर रहे थे। लेकिन, लखनऊ महापौर का टिकट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को तय करना था।सूत्रों के मुताबिक, अपर्णा यादव राजनाथ सिंह की कसौटी पर खरी नहीं उतरी थीं। इससे पहले अपर्णा ने लखनऊ कैंट और सरोजनी नगर से भी 2022 में टिकट की दावेदारी की थी। 2022 में ऐसी भी अटकलें लगाई गई थीं कि भाजपा उन्हें अखिलेश के खिलाफ उम्मीदवार बना सकती है। लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ था।

अपर्णा यादव अपने पद से नहीं थी खुश

बीजेपी में अपर्णा यादव राज्य महिला आयोग में उपाध्यक्ष पद मिलने से खुश नहीं थीं। वह कम से कम अध्यक्ष पद चाहती थीं। उपाध्यक्ष पद मिलने से नाराज अपर्णा ने कुछ दिनों तक जॉइन नहीं किया था। उसके बाद भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और सीएम योगी से बातचीत के बाद पद संभाला था।

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जानें अपर्णा यादव की शुरूआत से लेकर अबतक की कहानी

  • मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू।
  • अुपर्णा के पिता,अरविंद सिंह बिष्ट,पूर्व सूचना आयुक्त।
  • 2001 में प्रतीक से अपर्णा की मुलाकात हुई।
  • ई-मेल के माध्यम प्यार की शुरूआत हुई।
  • 2011 तक प्यार का सिलसिला चला।
  • अपर्णा – प्रतिक की 2011 में शादी हुई।
  • 2017 में अपर्णा ने सपा से चुनाव लड़ा।
  • 2022 में अपर्णा समाजवादी पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल हो गई।
  • 2024-2025 महिला आयोग की उपाध्यक्ष बन गई।
  • साल 2026 19 जनवरी को अपर्णा यादव के पति प्रतीक ने तलाक लेने का ऐलान किया।

अपर्णा यादव और प्रतीक यादव की तलाक की खबर इतनी चर्चा में क्यों?

यह विवाद इसलिए भी सुर्खियों में है, क्योंकि प्रतीक यादव सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं, जबकि अपर्णा यादव बीजेपी से जुड़ी हुई हैं. दोनों के बीच पहले भी मतभेद की खबरें आती रही हैं, लेकिन इस बार प्रतीक ने खुलकर तलाक की बात कही है. प्रतीक का कहना है कि अपर्णा की वजह से उनके परिवार के रिश्ते टूट गए और वह सिर्फ खुद की प्रसिद्धि और ताकत बढ़ाने में लगी हैं. अभी तक अपर्णा यादव की तरफ से इस पोस्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
यह घटना यादव परिवार की आंतरिक कलह को भी उजागर करती है. प्रतीक और अपर्णा को ‘स्वार्थी’ और ‘बुरी आत्मा’ कहकर निशाना साधा है. दोनों के बीच का झगड़ा अब सार्वजनिक हो गया है और लोग इंतजार कर रहे हैं कि अपर्णा इस पर क्या कहती हैं. फिलहाल प्रतीक यादव ने साफ कर दिया है कि वे जल्द से जल्द तलाक लेना चाहते हैं. यह मामला अब सिर्फ पति-पत्नी का नहीं, बल्कि राजनीतिक और पारिवारिक विवाद का भी बन चुका है।

INPUT- ANANYA MISHRA

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