कॉल सेंटर की आड़ में अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड, गोरखपुर से अमेरिका तक फैला ये जाल

गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़े संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह कॉल सेंटर चलाने का दिखावा करते हुए मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को निशाना बना रहा था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि एक तीन मंजिला मकान में अवैध रूप से कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है, जहां से विदेशी नागरिकों को ठगा जा रहा है। पुलिस अधीक्षक उत्तरी के निर्देशन, एसपी अपराध के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी कैम्पियरगंज के पर्यवेक्षण में गठित विशेष टीम ने मौके पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान पुलिस ने छह लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अभियुक्तों में पांच युवक और एक युवती शामिल हैं।

गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान रूपेश सिंह, अभिषेक पाण्डेय, हर्ष आर्या, सूरज कुमार तिवारी, अश्वनी कुमार मौर्या और शलोनी यादव के रूप में की है। इनमें से रूपेश सिंह और अभिषेक पाण्डेय के खिलाफ पहले भी लखनऊ के विभूतिखंड थाने में साइबर ठगी के मामले दर्ज हैं। गिरोह के चार अन्य सदस्य अभी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। गिरफ्तार युवकों और युवती ने पूछताछ में ठगी के तरीके का पूरा खुलासा किया है।

बरामद सामान और तकनीकी सेटअप

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 28 लैपटॉप, 37 हेडफोन, दो राउटर, कई मोबाइल फोन, महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। यह सामान कॉल सेंटर के संचालन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। लैपटॉप और हेडफोन पर फर्जी अमेरिकी एक्सेंट में बात करने के लिए सॉफ्टवेयर इंस्टॉल थे। पुलिस ने बरामद डिवाइसों को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।

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ठगी का तरीका और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह ई-मेल और डार्क वेब के जरिए अमेरिका के नागरिकों का डेटा हासिल करता था। कॉल सेंटर के एजेंट खुद को जॉन, जॉर्ज, लेविस जैसे फर्जी अमेरिकी नामों से पेश करते थे। वे पीड़ितों को बीमा क्लेम, टैक्स रिफंड, सरकारी सब्सिडी या टेक्निकल सपोर्ट का झांसा देकर फंसाते थे। जब कोई शिकार फंस जाता, तो कॉल को अमेरिका स्थित सहयोगी कंपनियों या कंप्यूटर तक फॉरवर्ड कर दिया जाता था, जहां पूरी ठगी की प्रक्रिया पूरी की जाती थी। ठगी से प्राप्त धनराशि का एक हिस्सा इन अभियुक्तों को मिलता था। पुलिस को आशंका है कि गिरोह के तार अन्य राज्यों और विदेशों तक फैले हुए हैं।

कानूनी कार्रवाई और जांच

इस मामले में थाना चिलुआताल पर मुकदमा संख्या 36/26 धारा 319(2), 318(4), 336(3), 340(2) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) एवं 66डी सूचना प्रौद्योगिकी एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस अब बरामद डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डाटा, बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रही है। एसपी नार्थ ज्ञानेंद्र, एसपी अपराध सुधीर जायसवाल और सीओ कैम्पियरगंज ने पुलिस लाइन स्थित व्हाइट हाउस सभागार में प्रेस वार्ता कर मामले का विस्तार से खुलासा किया।

सुरक्षा सलाह और जन जागरूकता

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, ई-मेल या मैसेज पर भरोसा न करें, खासकर जब कोई टैक्स रिफंड, बीमा क्लेम या सरकारी सब्सिडी का नाम लेकर पैसे मांगे। साइबर ठगी के ऐसे मामलों में तुरंत साइबर क्राइम सेल या 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करें। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर अपराध के खिलाफ सख्ती दिखाती है, और जांच आगे बढ़ने पर गिरोह के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है।

INPUT-ANANYA MISHRA

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