अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देने की चेतावनी दी है। तो वहीं ट्रंप ने जवाब में 20 गुना ताकत से हमले की धमकी दी है। जानिए इस टकराव का दुनिया और तेल बाजार पर क्या असर पड़ सकता है।
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब सिर्फ सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि, अगर ईरान ने तेल की सप्लाई रोकने की कोशिश की तो अमेरिका उस पर भीषण हमला करेगा। इस बयान के कुछ ही घंटों बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बेहद सख्त जवाब दिया। ईरान ने साफ शब्दों में कहा- होर्मुज जलडमरूमध्य से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। यह चेतावनी केवल अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी है। अगर यह समुद्री रास्ता बंद होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है।
अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का 11वां दिन हैं। इस बीच ईरान ने कहा है कि वह एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देगा। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के गुजरने को लेकर एक नई शर्त रखी है। इजराइली मीडिया वाइनेट की रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की सेना इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि कुछ देशों के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने दिया जा सकता है, लेकिन इसके लिए उन देशों को पहले इजराइल और अमेरिका के राजदूतों को अपने देश से निकालना होगा।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का बहुत अहम समुद्री रास्ता है। हर साल दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। हालांकि अमेरिकी चैनल CNN ने कहा है कि ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों पर सिक्योरिटी टैक्स यानी सुरक्षा शुल्क लगाने की योजना बना रहा है, खासकर उन जहाजों पर जो अमेरिका के सहयोगी देशों के हैं।
INPUT-ANANYA MISHRA















































