ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने नौरोज के मौके पर जारी अपने संदेश में कहा कि अमेरिका और इज़राइल के साथ जारी जंग में दुश्मन हार चुका है। खामेनेई ने बताया कि ईरानी जनता ने सरकार के खिलाफ खड़े होने की उम्मीद के बावजूद देश की एकता बनाए रखी। सुप्रीम लीडर के अनुसार, ईरानी जनता ने अलग-अलग विचारधाराओं और मतभेदों के बावजूद देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए एकजुटता दिखाई, जिससे दुश्मन अपने मकसद में सफल नहीं हो पाया।
खामेनेई ने अपने संदेश में कहा कि शुरुआती दिनों में उन्हें लगा था कि लगातार हमलों के बाद ईरानी जनता में डर-निराशा फैल जाएगी और लोग सरकार के खिलाफ खड़े हो जाएंगे, लेकिन यह मेरा बड़ा गलत आकलन था। उनके अनुसार, इस एकता और दृढ़ता ने दुश्मन की योजनाओं को विफल कर दिया। खामेनेई ने यह भी कहा कि ईरानी समाज में मतभेद मौजूद हैं, लेकिन राष्ट्रीय हितों के प्रति एकजुटता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
ट्रम्प ने NATO देशों को कायर बताया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान युद्ध में साथ न देने पर NATO सहयोगी देशों पर नाराजगी जताई है। ट्रम्प ने कहा है कि NATO देश कायर हैं और अमेरिका के बिना यह गठबंधन सिर्फ कागजी शेर है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि कई सहयोगी देश न्यूक्लियर ताकत वाले ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते थे। उनके अनुसार, अब जब युद्ध में अमेरिका ने सैन्य रूप से जीत हासिल की है, ये देश केवल तेल की बढ़ती कीमतों की शिकायत कर रहे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट और सैन्य मदद
ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट का जिक्र करते हुए कहा कि इसे सुरक्षित और खुला रखने के लिए सैन्य मदद देना बहुत आसान कदम है, जिसमें कम जोखिम है। लेकिन, NATO देशों ने इसमें भी मदद देने से पीछे हटने का विकल्प चुना। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि यह निष्क्रियता अमेरिका की नजर में कायरता के रूप में दर्ज की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह बहुत आसान सैन्य कदम है, जिसमें बहुत कम जोखिम है पर वे मदद नहीं करना चाहते। कायर हैं, और हम इसे याद रखेंगे।
युद्ध की व्यापक पृष्ठभूमि
ईरान और इज़राइल के बीच तनाव पिछले कई हफ्तों से जारी है, और अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है। ईरान ने अमेरिकी बेस डिएगो गार्सिया सहित विभिन्न ठिकानों पर लंबी दूरी की मिसाइलें दागी हैं। इसके जवाब में अमेरिका ने तीन अतिरिक्त युद्धपोत और लगभग 2,500 मरीन तैनात किए हैं। इस क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण तेल और गैस की वैश्विक कीमतें बढ़ गई हैं। खाड़ी देशों के प्रमुख ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों और जवाबी कार्रवाई ने वैश्विक आपूर्ति मार्ग बाधित कर दिए हैं।
INPUT -ANANYA MISHRA















































