भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने UGC के नए नियमों (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इन्हें पूर्णतः असंवैधानिक बताते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की। मिश्र ने कहा कि ये नियम जाति के आधार पर एकतरफा भेदभाव बढ़ाते हैं और सामान्य वर्ग के छात्रों को नुकसान पहुंचाते हैं। उनका कहना है कि अलग-अलग जाति के आधार पर नहीं, बल्कि सभी लोगों को समान सुरक्षा और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। नोएडा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए बयान में उन्होंने UGC को संविधान का हनन करने वाला बताया और झूठी शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान जोड़ने की मांग की। यह बयान UGC नियमों के खिलाफ चल रहे व्यापक विरोध का हिस्सा है, जिसमें सवर्ण संगठन, छात्र और कुछ BJP नेता भी शामिल हैं।
UGC नए नियम क्या हैं और क्यों विवाद?
UGC के नए नियमों का उद्देश्य और मुख्य प्रावधान
UGC ने 13 जनवरी 2026 को “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” अधिसूचित किए। ये 2012 के पुराने एंटी-डिस्क्रिमिनेशन गाइडलाइंस की जगह लेते हैं और अब कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं। मुख्य प्रावधान:
– सभी विश्वविद्यालयों/कॉलेजों में Equity Committee, Equal Opportunity Centre, Equity Squad और 24×7 हेल्पलाइन अनिवार्य।
– SC/ST/OBC छात्रों के खिलाफ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष जातिगत भेदभाव को अपराध माना जाएगा।
– शिकायतों की जांच, समाधान और रिपोर्टिंग अनिवार्य; संस्थान प्रमुख (VC/प्रिंसिपल) सीधे जिम्मेदार।
– गैर-अनुपालन पर UGC अनुदान रोक सकता है, डिग्री/ऑनलाइन कोर्स बंद कर सकता है या संस्थान को मान्यता से बाहर कर सकता है।
उद्देश्य: रोहित वेमुला, पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद कैंपस में जातिगत भेदभाव रोकना और समावेशी माहौल बनाना।
विरोध की मुख्य वजहें
विरोध करने वाले (सवर्ण संगठन, छात्र, कुछ BJP नेता) कहते हैं:
नियम केवल SC/ST/OBC के लिए सुरक्षा देते हैं, सामान्य वर्ग के छात्रों/शिक्षकों के लिए कोई प्रावधान नहीं – इससे “भेदभाव की hierarchy” बनती है।
“अप्रत्यक्ष भेदभाव” की परिभाषा अस्पष्ट, झूठी शिकायतों का खतरा।
सामान्य वर्ग के छात्रों को “स्वघोषित अपराधी” बना दिया गया।
संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव निषेध) का उल्लंघन।
सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर, नियम 3(C) को असंवैधानिक बताकर रद्द करने की मांग। #UGCRollback ट्रेंड कर रहा है।
कलराज मिश्र का बयान और प्रभाव
नोएडा में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कलराज मिश्र (विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष) ने कहा:
– ये नियम *संविधान का हनन* हैं और पूर्णतः असंवैधानिक।
– जाति आधारित एकतरफा कानून तुरंत हटाया जाए।
– शिकायत निवारण समितियों में सभी वर्गों (सामान्य सहित) का समान प्रतिनिधित्व अनिवार्य हो।
– झूठी शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान जोड़ा जाए।
– शिक्षा के मंदिरों में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
यह पहला बड़ा BJP नेता है जिसने खुले तौर पर वापस लेने की मांग की। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात का भी जिक्र किया।
देशव्यापी विरोध और राजनीतिक असर
– यूपी, दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, आगरा आदि में प्रदर्शन; कुछ जगह खून से PM को चिट्ठी लिखी गई।
– BJP में इस्तीफे (UP में पदाधिकारी), सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं।
– ABVP, NSUI जैसे संगठन भी विरोध में।
– शिक्षा मंत्रालय जल्द स्पष्टीकरण दे सकता है; कुछ BJP सांसद (मन्नन कुमार मिश्रा) ने भी नियमों पर सवाल उठाए।
– समर्थक (कुछ दल, संगठन) इसे सामाजिक न्याय का कदम बताते हैं।
यह मामला उच्च शिक्षा में समानता vs. एकतरफा भेदभाव के बीच संतुलन का बड़ा सवाल खड़ा करता है। जांच और संशोधन की मांग तेज है, आगे क्या होता है देखना होगा।
INPUT-ANANYA MISHRA














































