नई दिल्ली: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर समन अवहेलना के दो मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट परास दलाल की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ED यह साबित करने में नाकाम रही कि समन विधिवत तरीके से तामील किया गया था या केजरीवाल ने जानबूझकर समन से बचने की कोशिश की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ई-मेल के जरिए समन भेजना दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) या धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत वैध नहीं है। अभियोजन पक्ष मामले को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
यह फैसला गुरुवार (22 जनवरी 2026) को आया, जिसके बाद AAP ने इसे ‘सत्य की जीत’ करार दिया। केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर ‘सत्यमेव जयते’ लिखकर प्रतिक्रिया दी। हालांकि, BJP ने कहा कि यह फैसला केवल समन से जुड़े मामलों पर है, मुख्य आबकारी नीति घोटाले की जांच और मुकदमा जारी रहेगा।
दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 से जुड़े कथित घोटाले में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की थी, जिसमें केजरीवाल को कई बार समन जारी किए गए थे। ED ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल ने 2 नवंबर 2023, 21 दिसंबर 2023, 3 जनवरी 2024 और 18 जनवरी 2024 को जारी समन का पालन नहीं किया। इसके बाद ED ने फरवरी 2024 में मजिस्ट्रेट कोर्ट में दो शिकायतें दायर कीं, जिसमें IPC की धारा 174 (समन की अवहेलना) के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी।
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कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि ED ने समन मुख्य रूप से ई-मेल के जरिए भेजे थे, जो PMLA की धारा 50 या CrPC के प्रावधानों के तहत वैध सेवा नहीं मानी जा सकती। अदालत ने कहा कि ED यह साबित नहीं कर सकी कि समन व्यक्तिगत रूप से या वैध तरीके से तामील किया गया था। साथ ही, कोई ठोस सबूत नहीं था कि केजरीवाल ने जानबूझकर जांच में शामिल होने से परहेज किया। इसलिए, अभियोजन पक्ष का मामला संदेह से परे साबित नहीं हुआ और केजरीवाल को दोनों मामलों में बरी कर दिया गया।
यह फैसला केजरीवाल और AAP के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ED की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। AAP का कहना है कि यह ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’ का सबूत है, जबकि BJP ने जोर दिया कि मुख्य घोटाले का केस अलग है और जांच जारी रहेगी। ED ने केजरीवाल को मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन यह फैसला केवल समन अवहेलना पर है, मुख्य मुकदमे पर नहीं।
कोर्ट का विस्तृत आदेश अभी जारी होना बाकी है, लेकिन फैसले से ED को झटका लगा है। केजरीवाल पहले ही इस मामले में जमानत पर बाहर हैं, और यह फैसला उनकी कानूनी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
INPUT-ANANYA MISHRA














