पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार (10 मार्च 2026) को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ चल रहे अपने धरने को 5वें दिन समाप्त कर दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए इसे बंगाल की जनता की जीत बताया। कोर्ट ने SIR के दौरान नाम हटाए गए या विचाराधीन मतदाताओं की अपील सुनने के लिए स्वतंत्र अपीलीय अधिकरण (ट्रिब्यूनल) गठित करने का निर्देश दिया है। ममता ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने दरवाजा बंद कर दिया था लेकिन न्यायालय के आदेश से अब वह खुल गया है। धरना एक्सप्लेनेड (धर्मतला) क्षेत्र में मेट्रो चैनल पर चल रहा था जहां उन्होंने समर्थकों को संबोधित किया और इसे अस्थायी रूप से खत्म करने की घोषणा की।
धरना खत्म करने का कारण
ममता बनर्जी ने धरना खत्म करने की घोषणा करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मांग को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने SIR प्रक्रिया में नाम हटाए जाने के मामलों की सुनवाई के लिए रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों से बने ट्रिब्यूनल बनाने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह बंगाल की जनता के लिए न्याय और उम्मीद की नई किरण है। धरना खत्म करने से पहले उनके भतीजे और TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने मंच से अपील की कि सुप्रीम कोर्ट ने मांग को स्वीकार किया है इसलिए धरना समाप्त किया जाए। ममता ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि TMC आगे की घटनाओं पर नजर रखेगी और यदि जरूरी हुआ तो फिर से आंदोलन करेगी।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विवरण
सुप्रीम कोर्ट ने SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों में अपील के लिए अपीलीय अथॉरिटी गठित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश उन याचिकाओं पर आया जिसमें नाम हटाने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि अपील को विशेष मामलों के रूप में सुना जाएगा और न्यायिक विश्वास बरकरार रहेगा। ममता ने इसे आयोग के खिलाफ अपनी लड़ाई की सफलता बताया और कहा कि अब हर समुदाय के लिए न्याय सुनिश्चित होगा। उन्होंने आयोग पर भाजपा से प्रभावित होने का आरोप लगाया और कहा कि कोर्ट के आदेश से बंद दरवाजा खुल गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की योजना
धरना खत्म होने के बाद ममता बनर्जी ने पूर्व राज्यपाल सीवी आनंद बोस से मुलाकात की। उन्होंने बोस पर अन्याय होने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें पांच साल का कार्यकाल पूरा करने नहीं दिया गया। TMC का कहना है कि SIR प्रक्रिया में भेदभाव हुआ है और पार्टी इसे सुप्रीम कोर्ट में लड़ती रहेगी। यह धरना 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले TMC की रणनीति का हिस्सा था जहां मतदाता सूची में नाम हटाने को मुद्दा बनाया गया। विपक्षी दल इसे राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं।
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