UP: कुशीनगर (Kushinagar) में भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से 11 दिवसीय ‘भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव’ का आगाज हो गया है। महोत्सव का उद्देश्य महात्मा बुद्ध के जन्मस्थली लुंबिनी (नेपाल) और महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर के बीच गहरी सांस्कृतिक कड़ी स्थापित करना है। कार्यक्रम का उद्घाटन दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने किया। यह महोत्सव उत्तर प्रदेश संस्कृति एवं पर्यटन विभाग और स्थानीय जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने किया दर्शकों को मंत्रमुग्ध
उद्घाटन समारोह में पद्मश्री नलिनी और कमलनी ने अपनी नृत्य नाटिका से महोत्सव को शानदार शुरुआत दी। भारत और नेपाल के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों की साझा संस्कृति और बौद्ध धरोहर को जीवंत किया। स्थानीय लोग भी उत्साहपूर्वक इन प्रस्तुतियों का हिस्सा बने, जिससे कार्यक्रम में जोश और उत्सव का माहौल बना रहा।
11 दिवसीय महोत्सव की यात्रा
महोत्सव की शुरुआत कुशीनगर से हुई और यह आठ जनपदों से होकर गुजरेगा, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर ,महराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती ,बहराइच ,अन्य जनपद पीलीभीत। कार्यक्रम का समापन 28 फरवरी को पीलीभीत में होगा। इस दौरान दोनों देशों के लोग विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे और पारस्परिक आदान-प्रदान के अवसर प्राप्त करेंगे।
भारत-नेपाल मैत्री और क्षेत्रीय महत्व
इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच मित्रता को और मजबूत बनाना है। महात्मा बुद्ध की साझा विरासत और बौद्ध धर्म के महत्व को केंद्र में रखते हुए यह आयोजन दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे की संस्कृति समझने और सम्मान करने का अवसर प्रदान करता है। कुशीनगर से शुरू होकर यह महोत्सव सीमांचल, मिथिला क्षेत्र और नेपाल के सीमा क्षेत्रों में विशेष सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व रखता है।
Input- Raj Kumar Giri (Reporter Kushinagar)















































