लखीमपुर खीरी:उत्तर प्रदेश के दुधवा टाइगर रिजर्व के भीरा किशनपुर रेंज में एक बार फिर बाघ की दहशत देखने को मिली है। मंगलवार दोपहर एक महिला लकड़ी बीनने जंगल गई थी, जहां उस पर बाघ ने हमला कर दिया। हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। स्थानीय लोगों और वनकर्मियों ने उसे किसी तरह जंगल से बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। महिला की हालत नाजुक बताई जा रही है और उसे लखनऊ रेफर किया गया है।
घटना का विवरण
घटना दुधवा टाइगर रिजर्व के भीरा किशनपुर बीट के जंगल में हुई। महिला (नाम गोपनीय, उम्र लगभग 45 वर्ष) गांव की रहने वाली थी और रोज की तरह लकड़ी बीनने जंगल गई थी। दोपहर करीब 2 बजे अचानक बाघ ने उस पर हमला कर दिया। बाघ ने महिला के सिर, गर्दन और हाथों पर गहरे नाखून और दांतों के घाव किए। महिला की चीख सुनकर आसपास के मजदूर और ग्रामीण दौड़े, जिससे बाघ भाग गया। घायल महिला को स्थानीय लोगों ने ट्रैक्टर पर लादकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने महिला की हालत को देखते हुए उसे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर या केजीएमयू रेफर कर दिया। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हमले की जांच शुरू कर दी।
वन विभाग और प्रशासन की प्रतिक्रिया
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ने घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जंगल में बाघ की मौजूदगी पहले से थी और स्थानीय लोगों को जंगल में अकेले जाने से मना किया गया था। फिर भी कई लोग लकड़ी और अन्य संसाधनों के लिए जंगल में जाते हैं। वन विभाग ने महिला के परिवार को तत्काल मदद का आश्वासन दिया है और घायल महिला के इलाज का खर्च उठाने की बात कही है।
वनकर्मियों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। बाघ को ट्रैंक्विलाइज कर कैद करने या उसे कोर जोन में शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है। प्रशासन ने आसपास के गांवों में अलर्ट जारी किया है और लोगों से जंगल में अकेले न जाने की अपील की है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष का बढ़ता खतरा
दुधवा टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों में मानव-बाघ संघर्ष के मामले बढ़े हैं। आसपास के गांवों में बाघों के घुसने, मवेशियों पर हमला और कभी-कभी इंसानों पर हमले की घटनाएं आम हो गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल के किनारे बस्तियां बढ़ने, लकड़ी और चारे के लिए जंगल में जाना और बाघों की संख्या बढ़ने से यह समस्या गंभीर हो रही है।
स्थानीय लोग अब जंगल में जाने से डर रहे हैं। कई महिलाएं कह रही हैं कि लकड़ी बीनने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है, लेकिन अब जान जोखिम में पड़ रही है। वन विभाग से मांग की जा रही है कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा और वैकल्पिक रोजगार दिया जाए।
पिछले कुछ महीनों में दुधवा में बाघ हमले
पिछले साल भीरा रेंज में ही एक किसान पर बाघ ने हमला किया था।
खीरी जिले में कई बार बाघ गांवों में घुस आए हैं।
वन विभाग ने फेंसिंग और सोलर लाइट्स लगाने का काम शुरू किया है, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
यह घटना एक बार फिर दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष को उजागर करती है। प्रशासन और वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि बाघ को जल्द ट्रैक कर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा और पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद दी जाएगी।
INPUT-ANANYA MISHRA

















































