रेलवे में कथित जमीन के बदले नौकरी देने के मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को सीबीआई की चार्जशीट पर लालू यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती, हेमा यादव समेत 46 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने यह आदेश सुनाया, जिससे अब इन सभी के खिलाफ नियमित ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है।
52 आरोपियों को राहत, 46 पर चलेगा मुकदमा
इस मामले में सीबीआई ने कुल 103 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें से पांच की मौत हो चुकी है। अदालत ने अहम निर्णय में 52 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया, जबकि शेष 46 के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं में आरोप तय किए गए हैं। शुक्रवार की सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को छोड़कर अन्य सभी आरोपी अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए, जिनमें तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव भी शामिल थे।
Also Read: बिहार चुनाव से पहले लालू परिवार की बढ़ीं मुश्किलें, IRCTC घोटाले में कोर्ट ने तय किए आरोप
यूपीए दौर का मामला, रेल मंत्री रहते लगे आरोप
यह पूरा प्रकरण वर्ष 2004 से 2009 के बीच का है, जब यूपीए सरकार के दौरान लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि उस समय रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर बिना किसी विज्ञापन के नियुक्तियां की गईं और बदले में अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से जमीनें बेहद कम कीमत पर या उपहार के रूप में लालू परिवार और उनके करीबियों के नाम कराई गईं। सीबीआई का दावा है कि चयन प्रक्रिया नियमों के विपरीत थी।
सीबीआई के गंभीर आरोप, ईडी भी कर रही जांच
जांच एजेंसी के अनुसार, नौकरी पाने वाले अधिकतर उम्मीदवार बेहद गरीब पृष्ठभूमि से थे और उनके शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी संस्थानों से जारी बताए गए हैं। सीबीआई ने आरोपियों पर आईपीसी की धाराएं 120बी, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कई धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। इस मामले में आपराधिक जांच सीबीआई कर रही है, जबकि मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में अलग से केस चल रहा है।















































