UP: उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में बुधवार को एक बड़े वित्तीय घोटाले के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) ने समीर जोशी को गिरफ्तार कर लिया। यह मामला भारतीय जीवन बीमा निगम यानी Life Insurance Corporation of India (एलआईसी) के फंड में गड़बड़ी और करोड़ों रुपये की ठगी से जुड़ा हुआ है।
शिकायत के बाद दर्ज हुआ था मामला
इस घोटाले की शुरुआत अगस्त 2012 में हुई थी, जब एलआईसी के लखनऊ कार्यालय की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई। जांच में सामने आया कि कंपनी के फंड का दुरुपयोग किया गया और फर्जी दस्तावेजों के जरिए धन की हेराफेरी की गई। सीबीआई ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और कई अहम सबूत जुटाए।
फर्जी पॉलिसी और खातों में हेराफेरी
जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि आरोपियों ने ऐसे पॉलिसी धारकों के नाम पर क्लेम पास कराए, जिनका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था। इसके अलावा फरवरी 2006 से अगस्त 2010 के बीच लगभग 6.37 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को छिपाने के लिए खातों में हेरफेर की गई। इस मामले में 21 अगस्त 2014 को 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसमें समीर जोशी का नाम भी शामिल था।
नकली चेक बनाकर निकाली गई रकम
जांच में यह भी सामने आया कि एलआईसी के तत्कालीन कर्मचारी पंकज सक्सेना के साथ मिलकर समीर जोशी, उनकी पत्नी अंजू जोशी और कर्मचारी जितेंद्र कुमार के नाम पर नकली चेक तैयार किए गए। इन चेकों के माध्यम से करीब 62 लाख रुपये निकालकर आपस में बांट लिए गए। यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था।
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जमानत तोड़कर फरार, मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तारी
समीर जोशी को पहले भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन वह जमानत पर बाहर आ गया था। बाद में जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर वह फरार हो गया। लंबे समय से तलाश के बाद 31 मार्च को उसे गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। अब आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
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