राष्ट्रपति भवन परिसर से ब्रिटिश वास्तुशिल्पी सर एडविन लुटियंस की प्रतिमा को हटा दिया गया है। इसकी जगह भारत के प्रथम गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी की मूर्ति स्थापित की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 131वें एपिसोड में रविवार को इस फैसले की घोषणा की। पीएम ने कहा कि आज देश गुलामी की निशानियों को पीछे छोड़ रहा है और अपने गौरवशाली इतिहास को याद कर रहा है।
लुटियंस की प्रतिमा क्यों हटाई गई?
सर एडविन लुटियंस ने दिल्ली के कई प्रमुख भवनों – राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और इंडिया गेट – का डिजाइन तैयार किया था। उनकी प्रतिमा राष्ट्रपति भवन परिसर में वर्षों से स्थापित थी। प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि अब समय आ गया है कि हम अपने उन महान व्यक्तियों को याद करें जिन्होंने देश की आजादी और संविधान के निर्माण में योगदान दिया। लुटियंस की प्रतिमा हटाकर सी. राजगोपालाचारी की मूर्ति स्थापित करना एक प्रतीकात्मक कदम है।
सी. राजगोपालाचारी कौन थे?
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (1878-1972) स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल (1948-1950) थे। वे महात्मा गांधी के निकट सहयोगी, स्वतंत्रता सेनानी, लेखक और राजनेता थे। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक भी बने। उनकी मूर्ति राष्ट्रपति भवन में स्थापित करने को देश की गुलामी से आजादी और भारतीय नेतृत्व के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
पीएम मोदी का पूरा बयान
‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने कहा:
“आज देश गुलामी की निशानियों को पीछे छोड़ रहा है। राष्ट्रपति भवन से लुटियंस की प्रतिमा हटाई गई है और वहां सी. राजगोपालाचारी जी की मूर्ति स्थापित की गई है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि हमें अपने उन महान व्यक्तियों को याद करना है जिन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया और संविधान बनाया। यह सिर्फ एक प्रतिमा का बदलाव नहीं है, बल्कि सोच का बदलाव है।”
सियासी और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
भाजपा नेताओं ने इस फैसले की सराहना की और इसे ‘दे-कॉलोनाइजेशन’ का हिस्सा बताया।
विपक्षी दलों ने कहा कि यह प्रतीकात्मक राजनीति है और असल मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश है।
सोशल मीडिया पर #DeColonisation और #RajajiMurti ट्रेंड कर रहे हैं।
इतिहासकारों और बुद्धिजीवियों के बीच भी बहस छिड़ गई है कि क्या लुटियंस की प्रतिमा हटाना सही है या यह इतिहास को मिटाने की कोशिश है।
सेवातीर्थ और नई व्यवस्था का संकेत
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) साउथ ब्लॉक से सेवातीर्थ में शिफ्ट हो चुका है। कई लोग इसे पुरानी व्यवस्था से नई व्यवस्था की ओर बढ़ने का प्रतीक बता रहे हैं। राष्ट्रपति भवन परिसर में यह बदलाव भी उसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
INPUT-ANANYA MISHRA








































