यूपी में निजी अस्पतालों की नर्सों को बड़ी राहत, अब न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये तय

UP: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में निजी अस्पतालों में काम कर रहीं स्टाफ नर्सों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। स्वास्थ्य महानिदेशक (डीजी हेल्थ) ने आदेश जारी कर 100 बेड तक के सभी निजी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे नर्सों को कम से कम 20,000 रुपये प्रतिमाह वेतन दें। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के 2016 के निर्देशों और केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति की सिफारिशों के अनुपालन में लिया गया है। लंबे समय से कम वेतन का सामना कर रहीं हजारों नर्सों के लिए यह कदम राहत भरा माना जा रहा है।

100 बेड तक के अस्पतालों पर लागू होगा नियम

जारी आदेश के अनुसार 100 बेड तक संचालित होने वाले निजी अस्पतालों में 20,000 रुपये से कम वेतन देना गैरकानूनी माना जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस नियम का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अस्पताल का पंजीकरण या लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण और निगरानी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है।

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कमेटी की सिफारिशें और वेतन असमानता का मुद्दा

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2016 में निजी अस्पतालों में नर्सों की कार्य परिस्थितियों और वेतन की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की थी। समिति ने सिफारिश की थी कि स्टाफ नर्सों का वेतन 20,000 रुपये से कम न हो। बड़े अस्पतालों के लिए सरकारी वेतनमान के अनुरूप भुगतान की बात कही गई थी। वर्तमान में कई छोटे निजी अस्पतालों में नर्सों को 8,000 से 15,000 रुपये तक ही वेतन मिल रहा था, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह राशि कहीं अधिक है।

नर्सों की वर्षों पुरानी मांग को मिला समर्थन

निजी क्षेत्र में कार्यरत नर्सें लंबे समय से कम वेतन, अधिक कार्य घंटों और सीमित सुविधाओं जैसी समस्याओं का सामना कर रही थीं। इस आदेश के बाद नर्सिंग संगठनों और यूनियनों ने संतोष जताया है। उनका कहना है कि यह फैसला नर्सों के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि उन्होंने यह भी मांग की है कि सभी अस्पतालों में सामाजिक सुरक्षा लाभ जैसे पीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी अनिवार्य किए जाएं।

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निगरानी तंत्र और शिकायत व्यवस्था मजबूत

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि आदेश के पालन को सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण अभियान चलाए जाएंगे। नर्सें कम वेतन या अन्य शिकायतों को विभागीय पोर्टल या संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में दर्ज करा सकती हैं। विभाग का मानना है कि बेहतर वेतन से न केवल नर्सों की स्थिति मजबूत होगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

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