मायावती ने 2027 के चुनाव के लिए किया पहले ब्राह्मण प्रत्याशी के नाम का ऐलान!

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बीते 9 अक्टूबर को बसपा सुप्रीमो मायावती के आह्वान पर हुई महारैली के बाद सियासी गलियारे में हलचल तेज हो गई है। इस महारैली में उमड़े नीले समंदर ने वर्तमान की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। वहीं, इस रैली ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बसपा पार्टी के कार्यकर्ताओं के मन में जोश भर दिया है। चुनाव के शंखनाद को लेकर यूपी के जालौन जिले में मंगलवार को जिले की माधौगढ़ विधानसभा सीट से प्रत्याशी आशीष पांडे का ऐलान कर दिया गया है। इसकी आधिकारिक घोषणा पार्टी के बुंदेलखंड प्रभारी लालाराम अहिरवार द्वारा एक गेस्ट हाउस में की गई।

दरअसल, 2027 विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव की तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी कड़ी में मंगलवार को बसपा ने जालौन जिले की माधौगढ़ सीट से अपना कैंडिडेट का ऐलान कर चुनाव का शंखनाद कर दिया है। अगर बात 2017 के चुनावों की करें तो मुकाबला बेहद रोमांचक रहा था। शुरुआती चुनाव प्रचार में भाजपा के विधायक मूलचंद निरंजन का विरोध देखा गया, लेकिन राजनीति की बाजी इस कदर पलटी मारी कि बसपा की कैंडिडेट फिसलकर दूसरे नंबर पर आ गईं।

दरअसल ऐसा माना जाता है कि बहुजन समाज पार्टी की मुखिया चुनाव की ताऱीखों की घोषणा होने से पहले जिन सीटों पर जिन नेताओं को प्रभारी पद की जिम्मेदारी देती हैं, चुनाव में उन्हें ही टिकट दिया जाता है. इसी क्रम में मायावती ने आशीष पांडे को प्रभारी बनाकर संकेत दे दिए हैं कि वो ही माधौगढ़ सीट से पार्टी के प्रत्याशी बनेंगे.

बहुजन समाज पार्टी लगातार विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारियों में जुटी हुई है. माना जा रहा है कि होली के बाद बसपा कानपुर मंडल की पांच और सीटों पर प्रभारियों ने नाम की घोषणा कर सकती है. अक्सर बसपा अपनी प्रत्याशियों के नाम का ऐलान देरी से करती है लेकिन, इस बार मायावती अपनी तैयारियों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है.

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बसपा सुप्रीमो के आदेश पर अपना खोया जनाधार पाने के लिए बसपा पार्टी और उनके कार्यकर्ताओं ने कमर कस ली है। यही वजह है कि विधानसभा चुनावों में एक साल का वक्त है, लेकिन यहां पर पहले प्रत्याशी के तौर पर आशीष पांडे को चुनावी मैदान में उतारा है। इसकी खास वजह यह भी है कि यह सीट बसपा को विधायक देती रही है। फिलहाल इस नाम की घोषणा के बाद अन्य दलों के लोग सक्रिय रूप से चुनावी मैदान में अपनी जोर आजमाइश शुरू करने में जुट गए हैं।

इस बार मायावती समय से पहले ही प्रभारियों के नाम का ऐलान कर देगी. ताकि ज़मीन पर पार्टी की तैयारी हो सके और उम्मीदवारों को आम जनता के बीच समन्वय बनाने में आसानी हो और चुनाव की तैयारी के लिए पूरा समय मिल सके. आशीष पांडे के नाम का ऐलान कर मायावती ने साफ दिया है कि वो ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम वोटरों के समीकरण के साथ मैदान में उतरेंगी.

यूपी चुनाव में अभी एक साल का वक्त बचा है, इससे पहले बसपा के इंडिया अलाइंस के साथ गठबंधन को लेकर भी कई तरह के क़यास लग रहे हैं. कांग्रेस पार्टी तो खुलकर उन्हें अपने साथ आने का न्योता दे चुकी है. हालांकि मायावती ने साफ इनकार कर दिया है कि वो किसी गठबंधन के साथ नहीं जाएंगी. ऐसे में इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प हो सकता है.

जिले की माधौगढ़ सीट पर विधानसभा चुनाव हमेशा से दिलचस्प रहा है। यहां की सीट बसपा के लिए खास रही है। यहां पर आजादी के कुछ साल बाद 1962 से 1985 तक कांग्रेस का कब्जा रहा। रियासती घरानों का रसूख कम होने के बाद यहां हाथी ने दौड़ना शुरू कर दिया। 1989 में कांग्रेस प्रत्याशी राजा राजेंद्र शाह को हराकर बसपा से शिवराम कुशवाहा ने जीत दर्ज की। तब से बसपा पार्टी का ऐसा जनाधार बढ़ा कि अन्य पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखर गईं। यही वजह रही वर्ष 1989, 1993, 2002, 2007, 2012 में बसपा का विधायक चुना गया।

INPUT-ANANYA MISHRA

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