मायावती ने बसपा में 2027 चुनाव के लिए किया अहम बदलाव ,संगठन में  50% युवाओं को मिलेगा मौका

बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को और तेज करते हुए पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर पुनर्गठित करने का बड़ा निर्णय लिया है। पार्टी ने बूथ और सेक्टर स्तर तक नया ढांचा तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें 50 प्रतिशत पदों पर युवाओं को जिम्मेदारी दी जाएगी। साथ ही दो जिला प्रभारी पदों को समाप्त कर विधानसभा प्रभारियों को ही बूथ गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मायावती ने कांशीराम जयंती और आंबेडकर जयंती को धूमधाम से मनाने के भी सख्त निर्देश दिए हैं।

संगठन में बड़े बदलाव और युवा फोकस

मायावती ने बसपा की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का पूरा संगठन बूथ और सेक्टर स्तर तक मजबूत किया जाए। इस पुनर्गठन में विशेष रूप से 50 प्रतिशत पदों पर युवा कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाएगा। मायावती का मानना है कि युवा पीढ़ी में जोश और नई ऊर्जा है, जिसे पार्टी की ताकत बनाया जाना चाहिए। इससे पार्टी को जमीनी स्तर पर नई ताकत मिलेगी और पुराने ढांचे में आई सुस्ती भी दूर होगी।

जिला प्रभारी पद समाप्त, विधानसभा प्रभारी पर जिम्मेदारी

पार्टी ने संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा बदलाव करते हुए दो जिला प्रभारी पदों को समाप्त कर दिया है। अब विधानसभा स्तर के प्रभारियों को ही बूथ और सेक्टर गठन की पूरी जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य है कि संगठन का फोकस जिला स्तर से नीचे की ओर, यानी बूथ और सेक्टर तक सीधे पहुंचे। मायावती ने कहा कि बूथ मजबूत होगा तभी विधानसभा और जिला मजबूत होगा।

कांशीराम और आंबेडकर जयंती पर जोर

मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि बहुजन नायक कांशीराम की जयंती और बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती को पूरे उत्साह और धूमधाम से मनाया जाए। उन्होंने कहा कि ये दोनों जयंतियां बसपा के लिए केवल तिथियां नहीं, बल्कि विचारधारा को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने का अवसर हैं। पार्टी कार्यालयों, बूथों और गांव-गांव में कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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2027 चुनाव को लेकर मायावती की रणनीति

यह फैसला 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का हिस्सा माना जा रहा है। मायावती ने पिछले कुछ महीनों में कई बार संकेत दिए हैं कि बसपा इस बार पुरानी गलतियों से सबक लेकर जमीनी स्तर पर मजबूत वापसी की कोशिश करेगी। युवाओं को आगे लाना और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना इसी रणनीति का हिस्सा है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि मायावती विधानसभा चुनाव में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को और मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। साथ ही बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करके पिछले चुनावों में हुई कमजोरी को दूर करने की कोशिश की जा रही है।

यह फैसला बसपा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की सियासत में भी नई हलचल पैदा कर सकता है। अब देखना यह है कि युवाओं को मिलने वाला यह मौका पार्टी के लिए कितना कारगर साबित होता है।

INPUT-ANANYA MISHRA

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