मिर्जापुर : मिर्जापुर जिले के मझवां क्षेत्र में गंगा नदी पर बने पीपा पुल का हाल बेहद दयनीय हो गया है। उद्घाटन के मात्र 14 दिन बाद तेज आंधी में यह पुल हवा में उखड़ गया, जिससे स्थानीय लोगों और भदोही-मिर्जापुर के बीच आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। मझवां विधायक शुचिस्मिता मौर्य द्वारा 21 मार्च को लोकार्पित इस पुल की क्षति ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का विवरण
नेवढ़िया घाट से गेगराव घाट को जोड़ने वाला यह पीपा पुल गंगा नदी पर बनाया गया था। 2.45 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस अस्थायी पुल को चैत्र नवरात्रि और आम जनता की सुविधा के मद्देनजर जल्दबाजी में चालू किया गया था। लेकिन तेज हवाओं ने इसे बर्दाश्त नहीं किया और पुल के बड़े हिस्से हवा में उड़ गए। स्थानीय लोगों ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें पुल के पाइप और संरचना हवा में लहराते दिख रहे हैं।
MLA शुचिस्मिता मौर्य का उद्घाटन
भाजपा विधायक शुचिस्मिता मौर्य ने 21 मार्च को बड़े ताम-झाम के साथ इस पुल का उद्घाटन किया था। क्षेत्र के ग्रामीणों और भदोही जिले के महाराजगंज क्षेत्र के लोगों के लिए यह पुल बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि इससे गंगा पार करने में आसानी होती। उद्घाटन के समय पुल को मजबूत और सुरक्षित बताया गया था, लेकिन मात्र दो सप्ताह बाद ही यह क्षतिग्रस्त हो गया।
PWD की प्रेस विज्ञप्ति और वजह
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर तेज आंधी को नुकसान की मुख्य वजह बताया है। विभाग के अनुसार, प्राकृतिक आपदा के कारण पुल उखड़ गया, जिसमें मानवीय लापरवाही नहीं है। PWD के अधिशासी अभियंता ने कहा कि मरम्मत का कार्य तेजी से चल रहा है और दो दिनों में आवागमन बहाल कर दिया जाएगा।
स्थानीय लोगों पर पड़ा असर
इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से भदोही और मिर्जापुर के बीच आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के किसान, छात्र और दैनिक यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गंगा नदी पार करने के लिए अब पुराने घाटों या वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो समय और खर्च दोनों बढ़ा रहा है।
मरम्मत कार्य और भविष्य की चुनौतियां
PWD अधिकारियों ने दावा किया है कि दो दिन के अंदर पुल को ठीक कर लिया जाएगा। हालांकि, घटना ने अस्थायी पुलों की डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। आगामी मानसून सीजन को देखते हुए स्थानीय लोगों और विधायकों ने स्थायी समाधान की मांग की है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
क्षेत्र में इस घटना पर चर्चा तेज है। कुछ लोग निर्माण में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, जबकि विभाग इसे प्राकृतिक कारण बता रहा है। मझवां विधायक शुचिस्मिता मौर्य के कार्यकाल में यह दूसरी बड़ी घटना है, जिससे जनता की सुविधा प्रभावित हुई है।
यह घटना विकास कार्यों में गुणवत्ता और दीर्घकालिक योजना की अहमियत को रेखांकित करती है। स्थानीय प्रशासन से अब उम्मीद है कि पुल की मरम्मत के साथ-साथ बेहतर सुरक्षा उपाय भी अपनाए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
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