लखनऊ के चर्चित शत्रुघ्न सिंह और जितेंद्र त्रिपाठी दोहरे हत्याकांड में आखिरकार 19 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने गोसाईगंज से विधायक अभय सिंह समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इस निर्णय के साथ ही लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया पर विराम लग गया।
साक्ष्यों के अभाव में मिला आरोपियों को लाभ
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। इसी आधार पर अभय सिंह के अलावा रविंद्र उर्फ रज्जू, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही और फिरोज अहमद को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
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2007 में हुई थी सनसनीखेज वारदात
यह मामला 31 मार्च 2007 का है, जब बाजारखाला स्थित पूर्वांचल टेंट हाउस में घुसकर हमलावरों ने शत्रुघ्न सिंह उर्फ छोटू और उनके कर्मचारी जितेंद्र त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। बताया गया कि रात करीब 9 बजे बाइक सवार बदमाशों ने इस वारदात को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गए।
लंबी सुनवाई के बाद आया अंतिम फैसला
पुलिस ने जांच पूरी कर 13 अगस्त 2008 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके बाद से मामला अदालत में लंबित रहा। लगभग दो दशकों तक चली सुनवाई के बाद अब कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और पीड़ित पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।









































