UP: समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने काशी (Kashi) के विकास और संरक्षण को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर कड़ा प्रहार किया है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा को न तो विरासत की समझ है और न ही ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की। उनका आरोप था कि भाजपा इतिहास को मिटाकर अपना नया इतिहास गढ़ना चाहती है, जिसके चलते काशी जैसी प्राचीन नगरी की मूल पहचान को नुकसान पहुंचा है।
‘हेरिटेज संरक्षण की समझ नहीं’ का आरोप
अखिलेश यादव ने कहा कि काशी का मंदिर अत्यंत प्राचीन और सुंदर था, लेकिन मौजूदा सरकार की नीतियों के कारण पूरे काशी का स्वरूप बिगड़ गया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया के कई देशों में पूर्वजों की धरोहरों को सहेजकर रखा जाता है, जबकि यहां संरक्षण की परिभाषा ही नहीं समझी जा रही। उनका कहना था कि भाजपा को दूसरों के अच्छे काम भी स्वीकार नहीं हैं।
मंदिर तोड़ने और मुनाफाखोरी के गंभीर आरोप
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा के शासन में पौराणिक मंदिरों को तोड़ा गया है। उन्होंने यहां तक कहा कि धरती पर शायद ही किसी राजा ने इतने मंदिर तोड़े हों, जितने भाजपा ने तोड़े हैं। अखिलेश यादव का दावा था कि मंदिर तोड़कर ठेके दिए जाते हैं, फिर लागत का अनुमान बढ़ाया जाता है और इसी प्रक्रिया के जरिए मुनाफा कमाया जाता है।
‘न क्योटो बना, न काशी रही’ बयान से सियासी हलचल
अपने बयान में अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा काशी को क्योटो मॉडल पर विकसित करने की बात करती रही, लेकिन न क्योटो जैसा विकास हुआ और न ही काशी अपनी पहचान बचा पाई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह लोग तोड़फोड़ में विश्वास रखते हैं क्योंकि इससे उन्हें आर्थिक लाभ होता है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और भाजपा पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगे हैं।
















































