‘केवल जातिवादी मानसिकता वाले लोग कर रहे यूजीसी नियमों का विरोध…’, UGC विवाद पर बोली BSP सुप्रीमो मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिवादी भेदभाव को रोकने के लिए बनाई गई नई व्यवस्था पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस पर विरोध केवल उन्हीं लोगों का है, जिनकी मानसिकता जातिगत भेदभाव में उलझी हुई है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर लिखा कि इक्विटी कमेटी के नियमों का विरोध वे लोग कर रहे हैं, जो इसे अपने खिलाफ षड्यंत्र मान रहे हैं। उन्होंने इस विरोध को पूरी तरह अनुचित करार दिया।

नियम लागू करने से पहले विश्वास बनाना जरूरी: मायावती 

मायावती ने यह भी कहा कि सरकार और संस्थानों को इस तरह के नियम लागू करने से पहले सभी वर्गों का विश्वास हासिल करना चाहिए, ताकि सामाजिक तनाव उत्पन्न न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उद्देश्य केवल उच्च शिक्षा में समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि दलित और पिछड़े वर्ग के लोग स्वार्थी और भड़काऊ नेताओं के प्रभाव में नहीं आने चाहिए, जो समाज में विभाजन पैदा करने का काम करते हैं।

Also Read: बर्थडे पर मायावती का बड़ा ऐलान, 2027 में बसपा अकेले उतरेगी चुनावी मैदान में, ब्राह्मण समाज को लेकर दिया खास संदेश- सरकार बनने पर मिलेगा पूरा सम्मान

क्या है यूजीसी के नए नियम?

13 जनवरी 2026 को यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम लागू किए। इसके तहत सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में इक्विटी कमेटी, हेल्पलाइन और निगरानी दल बनाने का प्रावधान है। इन समितियों का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। हालांकि, इन नियमों के विरोध में मुख्य रूप से सवर्ण वर्ग के लोग सामने आए हैं।

(देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं.)