देश की राजधानी दिल्ली में सड़कों पर रौनक है, मेट्रो में भीड़ है और बाजारों में चहल-पहल है, लेकिन एक सवाल हर किसी के मन में गूंज रहा है – क्या यह शहर अब सुरक्षित है? जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में दिल्ली पुलिस के पास 807 लापता लोगों की शिकायतें दर्ज हुईं। हर दिन औसतन 54 लोग गायब हो रहे थे। इनमें से 509 मामले महिलाओं और लड़कियों के थे – यानी कुल का करीब दो-तिहाई। 191 नाबालिग भी इस सूची में शामिल थे, जिनमें 146 लड़कियां थीं। ये आंकड़े सुनकर दिल दहल जाता है और सवाल उठता है कि आखिर क्या हो रहा है दिल्ली में?
ये आंकड़े दिल्ली पुलिस के अपने रिकॉर्ड से आए हैं। 1 से 15 जनवरी तक 807 लोग रिपोर्ट हुए। महिलाओं और लड़कियों की संख्या 509 रही, जबकि पुरुष 298 थे। नाबालिगों में लड़कियों का हिस्सा सबसे ज्यादा था। पुलिस ने बताया कि अब तक 235 लोगों को ढूंढ लिया गया है, लेकिन 572 अभी भी गुम हैं। पूरे जनवरी में कुल 1,777 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल जनवरी के 1,786 से थोड़ा कम है। पिछले 10 सालों में दिल्ली में 1,80,805 लोग लापता हुए थे और उनमें से 77 प्रतिशत को परिवार से मिलाया जा सका। पुलिस का कहना है कि प्रति लाख आबादी पर लापता होने की दर अन्य बड़े शहरों से कम है।
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दिल्ली पुलिस ने इन आंकड़ों पर सफाई देते हुए कहा कि कोई अचानक बढ़ोतरी नहीं हुई है। जनवरी 2026 के आंकड़े पिछले सालों के औसत से नीचे हैं। ज्यादातर मामले घर से भागने, पारिवारिक झगड़ों, प्रेम संबंधों या पढ़ाई-नौकरी के लिए घर छोड़ने से जुड़े होते हैं। संगठित अपहरण या ट्रैफिकिंग के मामले बहुत कम पाए जाते हैं। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कई पोस्टों को “गलत” और “पेड प्रमोशन” बताया, जिनका मकसद सिर्फ डर फैलाना है। बच्चों के मामलों को सबसे ऊपर प्राथमिकता दी जाती है और ट्रेसिंग के लिए अलग-अलग टीमें काम करती हैं।
फिर भी विपक्ष और आम लोग इन सफाई से संतुष्ट नहीं हैं। AAP और कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस पर हमला बोला है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली की कानून-व्यवस्था अब आईसीयू में पहुंच गई है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। कई परिवारों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी ट्रेसिंग में देरी होती है। सोशल मीडिया पर लोग अपनी कहानियां शेयर कर रहे हैं और सरकार से सख्त कदम की मांग कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि रोजाना 30-35 महिलाओं के गायब होने का मतलब है कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं कमी है।
दिल्ली में लापता होने की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन ये शुरुआती आंकड़े फिर से इस मुद्दे को उजागर कर रहे हैं। हर दिन 50 से ज्यादा लोग गुम हो रहे हैं – यह सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि टूटते परिवारों की कहानी है। पुलिस का दावा है कि रिकवरी रेट अच्छा है और स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन सवाल वही है – क्या दिल्ली फिर से वह जगह बनेगी जहां लोग बिना डर के जी सकें? क्या महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी? या ये आंकड़े बढ़ते रहेंगे? यह सवाल अब सिर्फ दिल्लीवालों का नहीं, पूरे देश का है।
INPUT-ANANYA MISHRA



































