पंचायत चुनाव की तैयारी, पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का रास्ता साफ

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग (उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग) के गठन की राह साफ हो गई है। योगी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्पष्ट वादा किया है कि आयोग का गठन जल्द किया जाएगा। पिछले साल दिसंबर में आयोग का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और तब से यह आयोग बिना सदस्यों के कार्यरत नहीं है। हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका के जवाब में सरकार ने यह आश्वासन दिया है।

हाईकोर्ट में सरकार का हलफनामा

मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि पिछड़ा वर्ग आयोग का पुनर्गठन बहुत जल्द किया जाएगा। सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया चल रही है और शीघ्र ही आयोग के नए सदस्यों की नियुक्ति कर दी जाएगी। कोर्ट ने सरकार के इस वादे को गंभीरता से लिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की है।

पिछड़ा वर्ग आयोग का महत्व

उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग पिछड़े वर्गों की सूची तैयार करने, उनकी पहचान करने, आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सिफारिशें देने और सरकार को सलाह देने का काम करता है। आयोग के बिना पिछड़े वर्गों से संबंधित कई महत्वपूर्ण फैसले और सिफारिशें लंबित रह जाती हैं। खासकर पंचायत चुनाव में आरक्षण की सूची तैयार करने में आयोग की भूमिका अहम होती है।

चूंकि उत्तर प्रदेश में जल्द ही पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव होने हैं, इसलिए आयोग का गठन समय पर जरूरी माना जा रहा है। विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे को उठा रहे थे और सरकार पर पिछड़े वर्गों के साथ अन्याय करने का आरोप लगा रहे थे।

कार्यकाल समाप्त होने के बाद क्या हुआ

दिसंबर 2025 में आयोग का कार्यकाल पूरा हुआ
नए सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई
आयोग के बिना पिछड़े वर्गों से जुड़े कई केस और सिफारिशें अटकी हुई हैं
हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर गठन की मांग की गई

सरकार का पक्ष

सरकार ने हाईकोर्ट में कहा कि आयोग का गठन प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। सदस्यों की नियुक्ति के लिए मंत्रिमंडल से मंजूरी और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। सरकार का दावा है कि पंचायत चुनाव से पहले आयोग पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने कहा कि सरकार पिछड़े वर्गों के मुद्दों पर गंभीर नहीं है। उन्होंने मांग की कि आयोग का गठन तत्काल किया जाए और पंचायत चुनाव में आरक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो।

पंचायत चुनाव पर प्रभाव

यूपी में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 2026 में होने की संभावना है। आयोग के गठन से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की सूची तैयार करने और अन्य प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। हाईकोर्ट के दबाव और सरकार के वादे के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग कब तक गठित होता है और उसकी पहली बैठक कब होती है।

INPUT-ANANYA MISHRA