मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटाया गया: एनडीए ने राज्यपाल से मिलकर नई सरकार बनाने का दावा पेश किया

केंद्र सरकार ने मणिपुर में पिछले साल फरवरी 2025 से लागू राष्ट्रपति शासन को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के बाद राज्य में संवैधानिक व्यवस्था बहाल हो गई है। इस बीच, एनडीए के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर एनडीए के बहुमत के आधार पर नई सरकार गठन का दावा पेश किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी ने पुष्टि की कि एनडीए प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने का औपचारिक दावा किया। यह कदम मणिपुर में करीब एक साल से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता और जातीय हिंसा के बाद नई सरकार के गठन की दिशा में महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला

गृह मंत्रालय ने 4 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी कर मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त करने की घोषणा की। राष्ट्रपति शासन फरवरी 2025 में लागू किया गया था, जब मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की सरकार ने इस्तीफा दिया था और राज्य में कोई पार्टी या गठबंधन स्पष्ट बहुमत साबित नहीं कर सका था। इस दौरान राज्य में जातीय हिंसा (मैतेई-कुकी संघर्ष) के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हुई और हजारों विस्थापित हुए। केंद्र ने राज्यपाल को शासन का प्रभार सौंपा था। अब राष्ट्रपति शासन हटने के साथ विधानसभा बहाल हो जाएगी और नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी।

एनडीए का सरकार गठन का दावा

एनडीए के नेता वाई. खेमचंद सिंह ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर सरकार गठन का दावा पेश किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी ने बताया कि एनडीए प्रतिनिधिमंडल में भाजपा, एनपीएफ, एनडीसी और अन्य सहयोगी दल शामिल थे। खेमचंद सिंह ने दावा किया कि एनडीए के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत है और वे जल्द ही बहुमत साबित करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में शांति बहाली, विकास और जातीय सौहार्द के लिए नई सरकार की जरूरत है। राज्यपाल ने दावे को संज्ञान में लिया है और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई करेंगे।

मणिपुर विधानसभा की मौजूदा स्थिति
मणिपुर विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं।
भाजपा: 32 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)
कांग्रेस: 5-6 सीटें

अन्य: एनपीएफ, एनडीसी, निर्दलीय और छोटे दल

एनडीए के पास पहले से ही बहुमत था, लेकिन पिछले साल आंतरिक कलह और जातीय हिंसा के कारण सरकार गिर गई थी। अब एनडीए ने एक बार फिर एकजुट होकर सरकार बनाने का दावा किया है। वाई. खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

भाजपा: इसे राज्य में स्थिरता की वापसी बताया जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी ने कहा कि एनडीए राज्य की जनता के हित में काम करेगी।
कांग्रेस: कांग्रेस ने कहा कि केंद्र ने राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रपति शासन हटाया है और जातीय हिंसा के लिए जिम्मेदार सरकार को दोबारा सत्ता सौंपना गलत है।
कुकी संगठन: कुकी समुदाय के संगठनों ने चिंता जताई है कि नई सरकार में उनकी भागीदारी और सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।

आगे क्या होगा ?

राज्यपाल अब विधानसभा सत्र बुला सकते हैं, जहां एनडीए को बहुमत साबित करना होगा। अगर बहुमत साबित होता है तो नया मुख्यमंत्री शपथ लेगा। राज्य में शांति बहाली, विस्थापितों की वापसी और विकास कार्यों को गति देने की उम्मीद है। हालांकि, जातीय तनाव अभी भी बना हुआ है, इसलिए नई सरकार के सामने चुनौतियां बड़ी हैं। स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।

INPUT-ANANYA MISHRA

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