फर्रुखाबाद सेंट्रल जेल में कैदी ने लगाई फांसी: विभागीय लापरवाही पर बंदी रक्षक वीरेंद्र अविनाशी सस्पेंड, जेल अधीक्षक ने दी जानकारी

फर्रुखाबाद सेंट्रल जेल में एक कैदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। कैदी प्रभाकर उर्फ प्रभात (39 वर्ष), पुत्र रामकुमार राजपूत, थाना मेरापुर के ग्राम सिलसिंडा का निवासी था। उसे नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में POCSO एक्ट के तहत फरवरी 2024 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 24 मार्च 2024 को उसे सेंट्रल जेल में निरुद्ध किया गया था।

13 फरवरी को हुई घटना

मिली जानकारी के अनुसार, कैदी प्रभात को जेल की दरी कारखाने में दरी बनाने की ड्यूटी लगाई गई थी। 13 फरवरी दोपहर करीब 3:15 बजे उसने दरी कारखाने के निकट पुराने भवन में लोहे की रॉड पर गमछे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के समय वह ड्यूटी पर था और बंदी रक्षक की निगरानी में था।

बंदी रक्षक पर लापरवाही का आरोप

विभागीय जांच में बंदी रक्षक वीरेंद्र अविनाशी की लापरवाही सामने आई है। जेल में कैदी की निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी होने के बावजूद उसने समय पर ध्यान नहीं दिया, जिससे कैदी ने फांसी लगाने का मौका पा लिया। जेल के वरिष्ठ अधीक्षक आशीष तिवारी ने बताया कि लापरवाही के कारण बंदी रक्षक वीरेंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

जेल प्रशासन की प्रतिक्रिया

वरिष्ठ अधीक्षक आशीष तिवारी ने कहा कि कैदी की मौत के मामले में पूरी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि कैदी को दरी कारखाने में ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन उसकी निगरानी में चूक हुई। निलंबन के साथ-साथ अन्य बंदी रक्षकों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी। जेल में कैदियों की सुरक्षा और निगरानी को और सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

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परिजनों और समाज में शोक

कैदी प्रभात के परिवार में शोक का माहौल है। परिजन रो-रोकर बुरा हाल हैं। गांव में भी इस घटना से चर्चा है। कई लोग कह रहे हैं कि जेल में कैदियों की मानसिक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जाता और निगरानी में चूक से ऐसी घटनाएं होती हैं। पुलिस ने शव का पंचनामा किया और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

जेल में कैदियों की सुरक्षा पर सवाल

यह घटना जेलों में कैदियों की मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आजीवन कारावास जैसे लंबे सजा वाले कैदियों में अकेलापन और निराशा आम है। जेल प्रशासन को काउंसलिंग, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है।

INPUT-ANANYA MISHRA

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