UP: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई है। ऑर्थोपेडिक वार्ड में चूहों की बेखौफ चहलकदमी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें चूहे मरीजों के बेड के पास, ऑक्सीजन पाइपलाइन के करीब घूमते दिख रहे हैं। मरीजों और तीमारदारों में दहशत का माहौल है, क्योंकि इससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। डीएम ने प्रधानाचार्य को फटकार लगाई और तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
वायरल वीडियो ने उजागर की बदहाली
13 जनवरी 2026 को गोंडा मेडिकल कॉलेज के ऑर्थो वार्ड का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में साफ दिख रहा है कि चूहे मरीजों के बिस्तरों के नीचे और आसपास खुलेआम दौड़ रहे हैं। कुछ चूहे ऑक्सीजन पाइपलाइन के पास भी पहुंच गए, जिससे मरीजों की जान को खतरा हो सकता है।मरीजों का कहना है कि वे रात में सो नहीं पाते, क्योंकि चूहे उनके बिस्तर पर चढ़ने की कोशिश करते हैं। तीमारदारों ने बताया कि खाने-पीने की चीजें भी चूहों की नजर से नहीं बच पातीं।
प्रशासन की तत्काल प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होने के बाद गोंडा की जिला मजिस्ट्रेट प्रियंका निरंजन ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. धनंजय श्रीकांत कोटास्ताने को फटकार लगाई और तत्काल पेस्ट कंट्रोल स्प्रे करवाने के आदेश दिए। प्रधानाचार्य ने बताया कि चूहे मरीजों के रिश्तेदारों द्वारा लाए गए खाने की वजह से आकर्षित होते हैं। जांच शुरू कर दी गई है और जल्द ही स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
संक्रमण का खतरा
मरीजों का आरोप है कि वार्ड से दवा काउंटर तक चूहे बेखौफ घूमते हैं। ऐसे हालात में बैक्टीरिया और संक्रमण फैलने का बड़ा खतरा है, खासकर ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीजों के लिए। एक मरीज ने कहा, हम इलाज के लिए आए हैं, लेकिन यहां डॉक्टरों से ज्यादा चिंता चूहों की है। यह समस्या नई नहीं है, पहले भी गोंडा मेडिकल कॉलेज में आवारा कुत्तों और अन्य गंदगी की शिकायतें आईं हैं।
राजनीतिक बयानबाजी और सवाल
कांग्रेस ने वीडियो शेयर कर यूपी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि “मेडिकल कॉलेज इंसानों के लिए नहीं, चूहों के लिए बना लगता है। यह घटना सरकारी अस्पतालों में सफाई और रखरखाव की कमी को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित पेस्ट कंट्रोल, कचरा प्रबंधन और साफ-सफाई पर ध्यान न देने से ऐसी समस्याएं बढ़ती हैं।
कई सवाल खड़े होते हैं
एक तरफ जहां मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई और इलाज की उम्मीद है, वहीं ऐसी बदहाली मरीजों के लिए बड़ा झटका है। प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है, लेकिन स्थायी समाधान कब तक? यह घटना हमें याद दिलाती है कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में साफ-सफाई और सुरक्षा कितनी जरूरी है।

















































