कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। फर्रुखाबाद के कायमगंज स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की पारंपरिक विदेश नीति अब ‘नष्ट’ हो चुकी है और सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में काम कर रही है। उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष, इजराइल-गाजा मुद्दे और गठबंधन राजनीति पर भी खुलकर अपनी राय रखी। खुर्शीद ने कहा कि सरकार ने अपनी सामरिक स्वतंत्रता खो दी है और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता गंवा चुकी है। इस प्रेस वार्ता में कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी मौजूद रहे।
पारंपरिक विदेश नीति का पतन
सलमान खुर्शीद ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि भारत की पारंपरिक विदेश नीति अब पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुक रही है और अपनी सामरिक स्वतंत्रता को खो चुकी है। कायमगंज आवास पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत अब अपनी शर्तों पर काम करने का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि वैश्विक शक्तियों के सामने समर्पण की स्थिति बन गई है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष और तेल खरीद पर हमला
पूर्व विदेश मंत्री ने रूस से तेल खरीद के मुद्दे को उठाते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार का “अपनी शर्तों पर काम करने” का दावा खोखला साबित हो रहा है। खुर्शीद ने अमेरिका द्वारा 30 दिनों की अनुमति देने जैसी खबरों का हवाला दिया और कहा कि यह साफ दर्शाता है कि भारत अब स्वतंत्र फैसले लेने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने इसे सरकार का “समर्पण” करार दिया और सवाल उठाया कि क्या भारत अब वास्तव में सामरिक रूप से स्वतंत्र है।
इजराइल-गाजा संकट पर स्पष्ट रुख की मांग
गाजा में जारी मानवीय संकट पर बोलते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस हमास के हमलों का समर्थन नहीं करती, लेकिन मासूम बच्चों की जान जाने पर भारत को अपना विरोध दर्ज कराने का साहस दिखाना चाहिए। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि एक सच्चा मित्र वही है जो गलत को गलत कहे, लेकिन वर्तमान सरकार इजराइल के मामले में ऐसा करने से कतराती है। पूर्व विदेश मंत्री ने पीएम मोदी की पिछली इजराइल यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि दोस्ती में सच्चाई की कमी खल रही है।
गठबंधन राजनीति: आज की हकीकत
राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा करते हुए खुर्शीद ने कहा कि आज के दौर में गठबंधन एक वास्तविकता है। मायावती के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी पार्टी खुद को खत्म करके गठबंधन नहीं करती, लेकिन बड़ी पार्टियों को भी प्रभाव बनाने के लिए साथ की जरूरत होती है। उन्होंने पिछले अनुभवों से सीखने की सलाह दी और कहा कि अकेले लड़ने के क्या परिणाम रहे हैं, इसका आकलन जरूरी है। साथ ही, गठबंधन में सीटें कम होने पर कार्यकर्ताओं में निराशा होने की बात स्वीकार की, लेकिन व्यापक जनहित में नेतृत्व को कड़े फैसले लेने पड़ते हैं।
प्रेस वार्ता में प्रमुख उपस्थिति
इस प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद, अनिल मिश्रा, मृत्युंजय शुक्ला, शकुंतला देवी, उजैर अली खान और जुबैर खान सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इन नेताओं ने सलमान खुर्शीद के बयानों का समर्थन किया और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। प्रेस वार्ता में विदेश नीति और गठबंधन जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
INPUT -ANANYA MISHRA

















































