चंडीगढ़.
हरियाणा में दोहलीदार (गरीब ब्राह्मणों, पुजारियों और पुरोहितों), बुटीमार, भोंडेदार तथा मुकररीदार को दान में मिली जमीन का मालिकाना हक लेने के लिए अब उपायुक्त कार्यालयों में नहीं भटकना पड़ेगा।
प्रदेश सरकार ने 20 साल से इस जमीन पर काबिज परिवारों को मालिकाना हक देने का अधिकार उपमंडल अधिकारी नागरिक यानी एसडीएम को दे दिया है। अभी तक कलेक्टर (डीसी) के पास ही यह अधिकार था। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त राजस्व एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। सभी एसडीएम, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा राजस्व कानूनों के तहत प्रथम श्रेणी के सहायक कलेक्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है। पात्र परिवार अब मालिकाना हक के लिए एसडीएम के समक्ष आवेदन कर सकेंगे। मालिकाना हक मिलने से वह जमीन को आगे किसी को भी बेच सकेंगे। निजी व्यक्ति और संस्थाओं को दान में मिली जमीन बेचने पर कोई रोक नहीं रहेगी।














