प्रयागराज माघ मेला छोड़ने के बाद शंकराचार्य सरकार पर तीखे हमले कर रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा- मुझसे शंकराचार्य होने का प्रमाण पत्र मांगा गया। मैंने वह दे दिया। मेरे प्रमाण सच्चे थे, इसलिए उन्हें मानना पड़ा। अब प्रमाण मांगने का समय पीछे छूट गया। अब मुख्यमंत्री को अपने हिंदू होने का प्रमाण देना चाहिए।
अविमुक्तेश्वरानंद ने क्या कहा
हम आपको 40 दिन का समय दे रहे। इन दिनों में आप अपने गो-भक्त होने का प्रमाण दीजिए। अगर आप यह प्रमाण नहीं दे पाते, तो समझा जाएगा कि आप नकली हिंदू, कालनेमि, पाखंडी और ढोंगी हैं। सिर्फ दिखावे के लिए आपने गेरुआ वस्त्र धारण किया है।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सनातनी हिंदुओं पर डंडा बरसाना बंद कीजिए। देश से कुल बीफ का निर्यात का 40 फीसदी सिर्फ उत्तर प्रदेश का है। देश में पशुओं की संख्या में भैंस गाय की तुलना में 75 फीसदी है, बाकी जगह गाय की संख्या ज्यादा है। कुर्सी के लोभ में यह पाप आप कर रहे हैं। निर्यात को तत्काल बंद कीजिए नहीं तो 11 मार्च को आपको गैर हिंदू घोषित करेंगे। कहा कि आप सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं गुरु गोरखनाथ के शिष्य भी हैं। कहा कि माफी मांगने का तरीका होता है। लालच दे रहे थे की आप नहा लीजिए आपके ऊपर फूल बरसाएंगे। मैंने मना कर दिया। योगी पहले अपने आपको हिंदू सिद्ध करें।
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शंकराचार्य ने यूपी सरकार से कहा कि आप महाराष्ट्र से सीखिए आप नेपाल से सीखिए, उत्तर प्रदेश के मुखिया जिसके आप हैं. भारत से गौ मांस का जितना निर्यात हो रहा है उसका 40 परसेंट से ज्यादा लगभग आधा उत्तर प्रदेश से निर्यात हो रहा है. आप बताइए कि आप हिंदू हैं, नहीं तो भगवा चोला उतारिए।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- अब जब माघ आएगा, हम लोग फिर वहां जाएंगे। अब नकली हिंदुओं का पर्दाफाश किया जाना है। जितने भी हिंदू हैं, उनके साथ बहुत बड़ा छल हो रहा है। यह छल खुद को साधु, योगी, संत और भगवाधारी कहने वाले व्यक्ति और उसकी पार्टी द्वारा किया जा रहा है।
जाने विवाद क्या था
18 जनवरी को माघ मेले में स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद की पुलिस ने पालकी रोकी। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई, शिखा पकड़कर घसीटने का आरोप लगा। इसके बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। 11दिनों से शिविर में प्रवेश नहीं किया। प्रशासन ने दो दिनों में दो नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिनका अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया। सीएम योगी ने बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ कहा, जिससे विवाद और गहरा गया। जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी की तुलना कालनेमि और औरंगजेब से कर दी। इसके बाद 28 जनवरी की सुबह शंकराचार्य ने माघ मेला छोड़ दिया। अचानक हुए इस घटनाक्रम ने सबको चौंका दिया। कहा- आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं।
INPUT-ANANYA MISHRA














































