संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन का माहौल काफी गरम रहा। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिसके चलते सदन में कई बार हंगामे की स्थिति बन गई। दोनों पक्षों के सांसदों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।
किरण रिजिजू का विपक्ष पर पलटवार
इस दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कुछ सदस्य स्वयं को अत्यधिक ज्ञानी समझते हैं, लेकिन वे बिना तथ्यों की जांच किए ही आरोप लगाने लगते हैं। रिजिजू ने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही में तथ्यों और नियमों का सम्मान जरूरी है।
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सदन में बोलने के नियमों पर दिया जोर
रिजिजू ने यह भी कहा कि विपक्ष के नेता ने यह दावा किया कि उन्हें सदन में बोलने के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के नियमों के अनुसार चाहे प्रधानमंत्री हों, विपक्ष के नेता हों या कोई भी सांसद, सदन में अपनी बात रखने से पहले स्पीकर की अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
















































