‘विधायक के साथ जरूर कोई अनहोनी …’, अवैध मजार विवाद पर MLA शलभमणि त्रिपाठी को फिर मिली जान से मारने की धमकी

देवरिया जिले में रेलवे ओवरब्रिज के नीचे स्थित अब्दुल शाह गनी मजार के भूमि विवाद को लेकर सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस मामले को उठाने के बाद देवरिया सदर से बीजेपी विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी को सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। इससे पहले भी उन्हें Mdseraj813@gmail.com नामक ई-मेल आईडी से एक धमकी भरा संदेश भेजा गया था, जिसमें विधायक के साथ-साथ मुख्यमंत्री को भी खुलेआम गोली मारने की बात लिखी गई थी। इस धमकी के सामने आने के बाद पूरे प्रकरण ने गंभीर रूप ले लिया है।

 

पुराना भूमि विवाद फिर चर्चा में

अब्दुल शाह गनी मजार को लेकर भूमि विवाद कोई नया नहीं है। मजार रेलवे ओवरब्रिज के नीचे स्थित है और वर्षों से इसे लेकर स्वामित्व को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हर साल की तरह इस बार भी मजार कमेटी ने दो दिवसीय उर्स के आयोजन के लिए सदर कोतवाली में अनुमति मांगी थी। आवेदन की जानकारी सामने आते ही विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया।

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प्रमुख सचिव को विधायक का पत्र

बीजेपी विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने उर्स आयोजन की अनुमति पर आपत्ति जताते हुए प्रमुख सचिव को पत्र लिखा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जिस भूमि पर मजार स्थित है, वह राजस्व अभिलेखों में सरकारी दर्ज है और वहां किसी भी प्रकार का धार्मिक आयोजन नहीं होना चाहिए। विधायक का आरोप है कि मजार कमेटी के पास भूमि से जुड़े वैध दस्तावेज मौजूद नहीं हैं।

कोर्ट में मामला लंबित

विधायक द्वारा पहले भी मजार के विस्तार और कथित अवैध कब्जे की शिकायत की जा चुकी है, जिसके बाद यह मामला एसडीएम कोर्ट तक पहुंचा। शुरुआती सुनवाइयों में मजार कमेटी की ओर से स्वामित्व से जुड़े ठोस कागजात पेश नहीं किए जा सके। राजस्व रिकॉर्ड में भूमि को सरकारी बताया गया है, जिस पर विवाद अब भी अदालत में विचाराधीन है।

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प्रशासन ने लगाई रोक

विधायक के पत्र और कोर्ट में लंबित मामले को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। उर्स के आयोजन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई और मजार के गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि जब तक मामला अदालत में लंबित है और भूमि सरकारी मानी जा रही है, तब तक किसी भी प्रकार का आयोजन संभव नहीं है।

बयान और बढ़ता तनाव

विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और किसी भी तरह का आयोजन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसे कानून-व्यवस्था और भूमि अतिक्रमण से जुड़ा गंभीर मामला बताया।

दूसरी ओर, उर्स स्थगित होने के बाद विधायक को मिल रही धमकियों ने इस पूरे विवाद को और संवेदनशील बना दिया है।

28 साल पुरानी हत्या का जिक्र

विधायक डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि करीब 28 वर्ष पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामनगीना यादव ने भी इस मजार की वैधता पर सवाल उठाया था। इसके कुछ समय बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। इसी कारण लंबे समय तक लोग इस विषय पर बोलने से डरते रहे हैं।

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2017 में भी दर्ज हुआ था मामला

विधायक ने यह भी बताया कि वर्ष 2017 में इस जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर मुकदमा दर्ज किया गया था। उस समय एक लेखपाल सहित चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था, लेकिन बाद में मामला दबा दिया गया। अब मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद यह मामला दोबारा जांच के दायरे में आया है।

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