महाकुंभ में मुलायम सिंह यादव की मूर्ति लगाने पर सपा नेता संदीप यादव को गुंडा एक्ट नोटिस, अखिलेश बोले- PDA समाज का अपमान

UP: महाकुंभ क्षेत्र में मुलायम सिंह यादव ( Mulayam Singh Yadav) की मूर्ति लगवाने के मामले में सपा नेता और अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के करीबी माने जाने वाले संदीप यादव (Sandeep Yadav) के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत उनके लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसमें पूछा गया है कि क्यों न उन्हें जिला बदर किया जाए। यह कार्रवाई प्रयागराज पुलिस की रिपोर्ट और संस्तुति के आधार पर शुरू की गई है।

पुलिस रिपोर्ट में गंभीर आरोप

सहायक पुलिस आयुक्त कर्नलगंज की सिफारिश पर थाना जार्जटाउन की 29 दिसंबर की रिपोर्ट को आधार बनाया गया। रिपोर्ट में संदीप यादव को आपराधिक प्रवृत्ति का दुस्साहसिक व्यक्ति बताया गया है। पुलिस का दावा है कि उसका लंबा आपराधिक इतिहास है और क्षेत्र में उसका ऐसा दबदबा है कि लोग न तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का साहस करते हैं और न ही गवाही देने को तैयार होते हैं।

धरना-प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था पर असर का आरोप

पुलिस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संदीप यादव बिना अनुमति सार्वजनिक स्थानों पर धरना, चक्काजाम और पुतला दहन करता रहा है। इन गतिविधियों के जरिए वह भीड़ जुटाकर लोगों को उकसाता है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और यातायात प्रभावित होता है। प्रशासन को आशंका है कि आगामी माघ मेला 2026 के दौरान वह सौहार्दपूर्ण माहौल बिगाड़ सकता है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और सपा से नजदीकी

संदीप यादव 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रयागराज शहर उत्तरी सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुका है और दूसरे स्थान पर रहा था। उसे भाजपा प्रत्याशी हर्षवर्धन बाजपेई ने हराया था। संदीप समाजवादी युवजन सभा से जुड़ा बताया जाता है और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है। इसी बीच, माघ मेले में लगने वाले मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान के शिविर का उद्घाटन भी कार्रवाई के चलते टल गया है।

संदीप और अखिलेश की प्रतिक्रिया

कार्रवाई के बाद संदीप यादव ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि योगी सरकार और जिला प्रशासन को श्रद्धेय नेता जी का शिविर खटक रहा है, इसलिए जल्दबाजी में उसके खिलाफ गुंडा एक्ट और गैंगस्टर लगाने की तैयारी की जा रही है। वहीं अखिलेश यादव ने इसे पीडीए समाज का अपमान बताते हुए सवाल उठाए। अब अपर पुलिस आयुक्त न्यायालय की ओर से जारी नोटिस के बाद संदीप यादव को अपना पक्ष रखना होगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।