मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच ईरान की सेना ने एक बार फिर अमेरिकी सैन्य सहायता से जुड़े एक जहाज को निशाना बनाया है। यह जहाज अमेरिकी सेना को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने का काम करता था, जिस पर ओमान के सलालाह बंदरगाह के पास हमला किया गया।
ईरान का आधिकारिक बयान
ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी ने सरकारी टीवी के जरिए जानकारी दी कि यह कार्रवाई उन अमेरिकी गतिविधियों के जवाब में की गई है, जिन्हें ईरान ‘आक्रामक’ मानता है। उन्होंने कहा कि देश की सशस्त्र सेनाओं ने समुद्र में मौजूद इस लॉजिस्टिक जहाज को दूर से निशाना बनाया।
रिहायशी इलाकों पर हमलों से जनहानि
दूसरी ओर, ईरानी मीडिया के अनुसार अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमलों में कई रिहायशी इलाके प्रभावित हुए हैं। पश्चिमी प्रांत लोरेस्तान के बोरुजेर्द शहर में हुए हमले में सात लोगों की मौत हुई और दर्जनों घायल हुए। वहीं उत्तर-पश्चिमी शहर जंजन में भी हमले में कम से कम पांच लोगों की जान गई।
युद्ध का फैलाव और बढ़ता नुकसान
28 फरवरी से शुरू हुए हमलों के बाद हालात और बिगड़ गए हैं, जिससे पूरा क्षेत्र संघर्ष की चपेट में आ गया है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 8 मार्च तक 1,200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। राजधानी तेहरान में भी रातभर धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं और कई इमारतों को नुकसान पहुंचा।
अमेरिका और ईरान के बीच जवाबी कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। वहीं ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए सऊदी अरब स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिसमें 12 अमेरिकी सैनिक घायल हो गए। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में तनाव को और अधिक गंभीर बना दिया है।













































