लखनऊ: केजीएमयू (KGMU) धर्मांतरण मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी डॉक्टर रमीज (Dr. Rameez) से 48 घंटे की रिमांड पर गहन पूछताछ की गई, जिसमें उससे 100 से अधिक सवाल किए गए। पूछताछ में पुलिस को कई अहम सुराग और सबूत मिले हैं। आरोपी के पास से दो लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं, जिनमें संदिग्ध और आपत्तिजनक सामग्री मिली है।
मोबाइल और लैपटॉप से मिले अहम सबूत
पुलिस ने बताया कि रमीज के लैपटॉप में 13 साल का डिजिटल डेटा स्टोर था। इसमें हिंदू लड़कियों के फोटो और वीडियो, कॉल गर्ल्स की सूची, और कई अश्लील सामग्री शामिल है। लैपटॉप में विशेष फाइल ‘जन्नत’ में हिंदू लड़कियों का डेटा रखा गया था। फॉरेंसिक टीम डिलीट किए गए चैट और नंबर रिकवर करने में जुटी है। आरोपी ने पूछताछ के दौरान कई बिंदुओं पर चुप्पी साधी।
धर्मांतरण और युवतियों पर दबाव
पूछताछ में सामने आया कि रमीज ने कई युवतियों से धर्मांतरण के लिए संपर्क किया। पुलिस ने महिला रेजिडेंट डॉक्टर पर दबाव डालने के मामले में कई सवाल किए, लेकिन आरोपी ने कई जवाब देने से इनकार किया। इसके अलावा नेपाल सीमा तक उसके संपर्कों की भी जांच तेज कर दी गई है। आरोपी ने माता-पिता की संलिप्तता से इनकार किया और बताया कि धर्मांतरण के प्रयास में उनके शामिल नहीं थे।
कॉल गर्ल्स और ब्लैकमेलिंग का नेटवर्क
रमीज ने अपने लैपटॉप में कॉल गर्ल्स का डेटा जमा कर रखा था। इसमें नाम, संपर्क और अन्य जानकारी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इसका इस्तेमाल वह धार्मिक रूपांतरण के रैकेट में युवाओं को फंसाने और ब्लैकमेलिंग के लिए करता था। इसके अलावा, आरोपी नशे की हालत में आपत्तिजनक गतिविधियों को अंजाम देता था।
मेडिकोज ग्रुप और संदिग्ध नेटवर्क
पूछताछ में रमीज ने मेडिकोज ग्रुप से जुड़े अपने प्रभाव और नेटवर्क के बारे में जानकारी दी। पुलिस ने इसके तकनीकी सबूतों की जांच शुरू कर दी है। उसके दूसरे लैपटॉप से 50 से अधिक युवतियों के वीडियो भी मिले हैं, जिनमें उसकी पहली पत्नी समेत अन्य लड़कियों के वीडियो शामिल हैं। इन वीडियो का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग और दबाव बनाने के लिए किया जाता था।











































