केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, घरेलू गैस संकट टालने के लिए ESMA लागू, रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का सख्त आदेश

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान-इज़राइल संघर्ष और बढ़ते युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है। भारत, जो LPG का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है, इस संकट से बचने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (ESMA), 1955 के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सभी तेल रिफाइनरियों (सार्वजनिक और निजी) को LPG उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू रसोई गैस की कमी को रोकना और आम जनता की रसोई को सुरक्षित रखना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में LPG की पर्याप्त स्टॉक है और घरेलू उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन सतर्कता के तौर पर यह फैसला लिया गया है।

ESMA के तहत रिफाइनरियों पर क्या निर्देश?

5 मार्च 2026 को जारी आदेश में सभी रिफाइनरियों को प्रोपेन और ब्यूटेन (LPG के मुख्य घटक) स्ट्रीम्स का अधिकतम उपयोग LPG उत्पादन में करने को अनिवार्य किया गया है। इन स्ट्रीम्स को पेट्रोकेमिकल्स या अन्य डाउनस्ट्रीम उत्पादों के लिए इस्तेमाल करने पर रोक लगाई गई है। उत्पादित LPG को केवल तीन सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को उपलब्ध कराना होगा। ये कंपनियां इसे घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचाएंगी। किसी उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान है। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू है और इसका मकसद घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाकर आयात निर्भरता कम करना है।

चार प्राथमिक सेक्टर्स को गैस आपूर्ति में प्राथमिकता

सरकार ने प्राकृतिक गैस और LPG की आपूर्ति को चार प्रमुख क्षेत्रों में प्राथमिकता दी है, ताकि आवश्यक सेवाएं बाधित न हों। ये सेक्टर्स हैं:

1. घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस सप्लाई – घरों में सीधे पाइपलाइन से गैस पहुंचाने वाली सेवाएं।
2. ट्रांसपोर्ट के लिए कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) –वाहनों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल।
3. LPG उत्पादन (श्रिंकेज आवश्यकताओं सहित) -रसोई गैस बनाने की प्रक्रिया।
4. पाइपलाइन कम्प्रेसर फ्यूल और अन्य आवश्यक पाइपलाइन ऑपरेशन – गैस परिवहन की बुनियादी जरूरतें।

इन सेक्टर्स को पिछले छह महीनों के औसत खपत के 100% तक गैस उपलब्ध कराई जाएगी (ऑपरेशनल उपलब्धता के अधीन)। इससे गैर-जरूरी क्षेत्रों (जैसे कुछ कमर्शियल या पेट्रोकेमिकल) में सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

क्यों उठाया गया यह कदम? 

भारत LPG की कुल जरूरत का लगभग 60% आयात करता है, जिसमें 85-90% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है, जो फिलहाल युद्ध से प्रभावित है। पिछले साल देश में करीब 33 मिलियन टन LPG की खपत हुई थी। घरेलू उत्पादन केवल 40% के आसपास है। संकट से बचने के लिए सरकार ने अमेरिका से 2026 में 2.2 मिलियन टन LPG आयात का अनुबंध भी किया है। हाल ही में घरेलू सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़े हैं (दिल्ली में अब 913 रुपये), और बुकिंग नियम में बदलाव कर 21 दिन की बजाय 25 दिन बाद नया सिलेंडर बुक करने की अनुमति दी गई है, ताकि जमाखोरी रोकी जा सके।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलाव?

सरकार ने आश्वासन दिया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को कोई कमी नहीं होगी। अतिरिक्त उत्पादित LPG सिर्फ घरेलू उपयोग के लिए होगा। हालांकि, कमर्शियल सेक्टर (होटल, रेस्टोरेंट) में कुछ कमी की शिकायतें आई हैं, और कुछ जगहों पर सप्लाई प्रभावित हुई है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये सब्सिडी जारी रहेगी। विपक्ष ने महंगाई पर केंद्र पर हमला बोला है, लेकिन सरकार का कहना है कि यह कदम आम आदमी की रसोई को प्राथमिकता देने वाला है।

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