उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार पर लगातार शिकंजा : एक ही दिन चार जगहों पर घूसखोर पकड़े गए — JE, लाइनमैन, लेखपाल और ITI इंस्ट्रक्टर रंगे हाथ गिरफ्तार

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में एंटी करप्शन टीम की सक्रियता से भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। शुक्रवार को वाराणसी, औरैया, मिर्जापुर और झांसी में अलग-अलग मामलों में सरकारी कर्मचारियों को घूस लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। कुल 47,000 रुपये की रिश्वत बरामद हुई। इनमें बिजली विभाग के दो जेई-लाइनमैन जोड़ियों, एक लेखपाल और एक महिला ITI इंस्ट्रक्टर शामिल हैं।

1. वाराणसी: बिजली विभाग में बिजली चोरी के मामले में FIR दर्ज कराने की धमकी देकर 20,000 रुपये घूस मांगी गई। एंटी करप्शन टीम ने जेई नवनीत यादव और संविदा लाइनमैन लक्ष्मण यादव (मंडुआडीह पावर हाउस) को रंगे हाथ पकड़ लिया। शिकायतकर्ता शुभम श्रीवास्तव ने शिकायत की थी। दोनों को गिरफ्तार कर मुकदमा दर्ज किया गया।

2. औरैया: फफूंद क्षेत्र के केशमपुर सब स्टेशन पर लाइन शिफ्ट कराने के नाम पर 50,000 रुपये मांगे गए थे, जिनमें से 11,000 रुपये की रिश्वत ली जा रही थी। एंटी करप्शन टीम ने जेई अजय कुमार पांडेय (30 वर्ष, बनारस निवासी) और लाइनमैन लल्लन कुशवाहा (25 वर्ष, केशमपुर निवासी) को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। शिकायतकर्ता दीपक बाबू ने सूचना दी थी।

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3. मिर्जापुर: सदर तहसील के लेखपाल सत्येंद्र सिंह बघेल ने जमीन की पैमाइश कराने के नाम पर **10,000 रुपये की घूस मांगी। एंटी करप्शन टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। उनके सहयोगी परमेश्वर को भी हिरासत में लिया गया। दोनों से देहात कोतवाली में पूछताछ चल रही है।

4. झांसी: मऊरानीपुर स्थित राजकीय आईटीआई में सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन और एडमिट कार्ड जारी करने के नाम पर 6,000 रुपये (प्रति छात्र 3,000 रुपये) घूस ली जा रही थी। एंटी करप्शन टीम ने महिला अनुदेशक (इंस्ट्रक्टर) रेनू वर्मा को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। वह मैकेनिकल, आईसीटीसीएम और कोपा ट्रेड की हेड हैं। छात्रों की शिकायत पर कार्रवाई हुई।

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समग्र प्रभाव :

ये चारों घटनाएं एक ही दिन में हुईं, जो उत्तर प्रदेश सरकार और एंटी करप्शन संगठन की भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की मुहिम को मजबूती देती हैं। एंटी करप्शन टीम ने शिकायतकर्ताओं की सूचना पर त्वरित एक्शन लिया और सभी मामलों में रिश्वतखोरी के सबूत बरामद किए गए। पुलिस और एंटी करप्शन विभाग ने सभी आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गिरफ्तार कर्मचारियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

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