आम बजट के आने से पहले आज का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था और आम नागरिक के लिए बेहद अहम है. बजट का इंतजार कर रहे हर शख्स की निगाहें आज संसद की ओर टिकी हैं. आज यानी 29 जनवरी, गुरुवार को सरकार ‘इकोनॉमिक सर्वे 2026’ पेश करने जा रही है. यह दस्तावेज असल में देश की आर्थिक सेहत का वह ‘रिपोर्ट कार्ड’ है, जो बताता है कि बीते एक साल में हमने क्या खोया और क्या पाया. साथ ही, यह रिपोर्ट इस बात का भी संकेत देती है कि आने वाले दिनों में महंगाई, रोजगार और व्यापार की हवा किस ओर बहेगी।
संसद में आज खुलेगा अर्थव्यवस्था का ‘लेखा-जोखा’
संसद के बजट सत्र का आगाज हो चुका है और आज की कार्यवाही बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है. मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन आज सुबह 11 बजे आर्थिक सर्वेक्षण 2026 को संसद के पटल पर रखेंगे. इसे लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में प्रस्तुत किया जाएगा. आज पेश होने वाला यह दस्तावेज इसलिए खास है क्योंकि यह 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले आम बजट की दिशा और दशा तय करने में मदद करेगा।
इन 6 बड़ी बातों पर रहेगी नजर
1. महंगाई: सर्वे में बताया जाएगा कि दाल, तेल और सब्जियों की कीमतें बढ़ने की असली वजह क्या रही। क्या आने वाले दिनों में आपको बढ़ती कीमतों से राहत मिलेगी?
2. GDP: क्या भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा? अगर GDP बढ़ती है, तो इसका सीधा मतलब है कि देश में नए निवेश आएंगे और व्यापार बढ़ेगा।
3. नौकरी: IT, मैन्युफैक्चरिंग या सर्विस सेक्टर। किस सेक्टर ने सबसे ज्यादा नौकरियां दीं और कहां छंटनी का खतरा है? युवाओं के लिए यह सबसे अहम सेक्शन होगा।
4. खेती-किसानी: देश की आधी आबादी खेती पर निर्भर है। सर्वे बताएगा कि इस साल खेती की विकास दर क्या रही और क्या किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार के पास कोई नया प्लान है।
5. सरकारी कर्ज: सरकार अपनी कमाई से ज्यादा जो खर्च करती है, उसे ‘राजकोषीय घाटा’ कहते हैं। घाटा कम होने का मतलब है-मजबूत इकोनॉमी और कम महंगाई।
6. विदेशी मुद्रा भंडार: दुनियाभर में मंदी की आहट के बीच भारत की विदेशी मुद्रा भंडार कितना है? यह भंडार जितना भरा होगा, डॉलर के मुकाबले हमारा रुपया उतना ही मजबूत रहेगा।
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किसे कहा जाता है अर्थव्यवस्था का आईना
इकोनॉमिक सर्वे देश की कमाई और खर्च का पूरा ब्यौरा है. यह रिपोर्ट बताती है कि सरकार ने पिछले साल जो लक्ष्य रखे थे, उनमें कितनी सफलता मिली. इसमें विकास की रफ्तार, महंगाई की दर और विदेशी मुद्रा भंडार जैसी अहम जानकारियां होती हैं. आम आदमी के नजरिए से देखें तो इसमें खेती, उद्योग और नौकरियों की ताजा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की जाती है. यह दस्तावेज सरकार को यह भी बताता है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखने के लिए किन क्षेत्रों में सुधार की सख्त जरूरत है. आमतौर पर इसके दो हिस्से होते हैं एक में अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर होती है और दूसरे में विशिष्ट मुद्दों पर फोकस किया जाता है।
सर्वे क्यों जरूरी है?
इकोनॉमिक सर्वे अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर है। इससे पता चलता है कि देश की अर्थव्यवस्था कैसी है और इसमें सुधार के लिए क्या करने की जरूरत है।
1950-51 में पेश हुआ था पहला सर्वे देश का पहला इकोनॉमिक सर्वे 1951 में पेश किया गया है। तब यह केंद्रीय बजट का ही एक हिस्सा था। 1964 के बाद से इसे बजट से अलग कर दिया गया। तब से बजट डे से एक दिन पहले इकोनॉमिक सर्वे संसद में पेश होता है।
INPUT-ANANYA MISHRA


















































