पीरियड्स में पेड लीव की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज,बिहार में सरकारी महिला कर्मियों को हर माह 2 दिन पीरियड्स लीव मिलती है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महिलाओं कर्मचारियों और छात्राओं के लिए देशभर में मासिक धर्म अवकाश नीति की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ऐसी नीति अनजाने में लैंगिक रूढ़िवादिता को बढ़ावा दे सकती है और इससे महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि और नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से कतराने लगेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को देशभर में महिला छात्रों और कामकाजी महिलाओं को पीरियड्स में पेड लीव देने की मांग वाली याचिका खारिज हो गई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी याचिकाएं अनजाने में महिलाओं के बारे में बनी रूढ़ियों को और मजबूत कर सकती हैं। यह कानून बनाया तो महिलाओं को कोई काम नहीं देगा, उनका करियर खत्म हो जाएगा।CJI ने कहा- ये याचिकाएं डर पैदा करने के लिए, महिलाओं को हीन दिखाने के लिए, यह जताने के लिए दायर की जाती हैं कि पीरियड्स उनके साथ होने वाली कोई बुरी चीज है। यह उनका पॉजिटिव राइट है, लेकिन उस नियोक्ता के बारे में सोचिए, जिसे पेड लीव देनी होगी। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान मेंस्ट्रुअल लीव को अनिवार्य बनाने के संभावित सामाजिक परिणामों के बारे में चिंता जाहिर की।

पेड मेंस्ट्रुअल लीव की याचिका लेकर शैलेंद्र मणि तीसरी बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। पहली याचिका का निपटारा फरवरी 2023 में किया गया था, जिसमें याचिकाकर्ता को केंद्रीय महिला एवं बाल मंत्रालय के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति दी गई थी। 2024 में याचिकाकर्ता ने फिर कोर्ट में याचिका लगाई और कहा कि मंत्रालय ने उनके पक्ष में दिए गए जवाब पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उस याचिका का निपटारा जुलाई 2024 में किया गया था, जिसमें केंद्र सरकार से नीतिगत निर्णय लेने को कहा गया था।

नई याचिका की मांगें

भारत सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे कानून/नीतियां/सरकारी आदेश लाने का निर्देश देना जो मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को होने वाली पीड़ा (डिसमेनोरिया, एंडोमेट्रियोसिस, गर्भाशय फाइब्रॉइड, एडिनोमायोसिस, पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज) से संबंधित समस्याओं को मान्यता देते हों और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के अनुरूप छुट्टी देने समेत सभी जरूरी राहतें देते हों। संविधान के अनुच्छेद 32 के साथ अनुच्छेद 14, 21 और अनुच्छेद 141 और 142 के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए कामकाजी महिलाओं और महिला छात्रों को अवकाश के रूप में राहत प्रदान करने के संबंध में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए निर्देश जारी करें।

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बिहार में महिलाओं को 1992 से 2 दिन की छुट्‌टी मिल रही

पीरियड्स लीव पर देश में कोई राष्ट्रीय कानून या एकसमान नीति नहीं है। हालांकि, राज्यों, संस्थानों या कंपनियों के स्तर पर लागू है।

बिहार में सरकारी महिला कर्मियों को हर माह 2 दिन पीरियड्स लीव मिलती है। 1992 से नीति लागू।
कर्नाटक में हर माह 1 छुट्‌टी। 2025 में पहला राज्य बना, जहां सरकारी-निजी दोनों क्षेत्रों में पीरियड लीव अनिवार्य है।
ओडिशा में सरकारी महिला कर्मियों को प्रतिमाह 1 दिन छुट्‌टी मिलती है। 2024 से लागू है।
केरल ने 2023 में उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्राओं को प्रतिमाह छुट्‌टी की सुविधा। 75% के बजाय 73% हाजिरी अनिवार्य।
जोमैटो, स्विगी, एलएंडटी, एसर इंडिया जैसी कंपनियां महिला कर्मियों को ये सुविधा दे रहीं।
सांसद हिबी ईडन ने 2022 में प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया, जिसमें महिलाओं को हर माह 3 दिन छुट्टी देने का प्रस्ताव था।
दुनिया को देखें तो जापान में ये 1947 से लागू। इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया व स्पेन में भी है।
ऑस्ट्रेलिया में एक अध्ययन में 73% प्रतिभागियों ने पीरियड्स लीव के कर्मियों पर सकारात्मक प्रभाव बताए। बेहतर वर्क कल्चर बन पाया।

INPUT-ANANYA MISHRA

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