अयोध्या जेल से तन्हाई बैरक में बंद दो शातिर कैदी रात 2 बजे भागे

अयोध्या जिला जेल में रात के अंधेरे में बड़ा जेल ब्रेक हुआ। विशेष सुरक्षा वाली तन्हाई बैरक में बंद दो खतरनाक कैदी—अमेठी के गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज अग्रहरी और सुल्तानपुर के शेर अली—रात करीब 2 बजे जेल से फरार हो गए। दोनों ने बैरक की दीवार से 30 से ज्यादा ईंटें उखाड़कर छेद बनाया, फिर बाउंड्री वॉल फांदकर भाग निकले। घटना की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीजी जेल पीसी मीणा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ जेल अधीक्षक उदय प्रताप मिश्रा, जेलर जेके यादव, डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी सहित एक हेड वार्डर और तीन वार्डरों को कुल 7 कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर दिया। फरार कैदियों की तलाश में पुलिस, एसओजी और डॉग स्क्वायड की टीमें जुटी हुई हैं।

29 जनवरी 2026 की रात अयोध्या जिला जेल में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई। जेल की तन्हाई बैरक (स्पेशल सिक्योरिटी बैरक), जहां हाई रिस्क वाले कैदियों को रखा जाता है, से दो कैदी फरार हो गए। फरार कैदियों की पहचान अमेठी जिले के मुसाफिर खाना निवासी गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज अग्रहरी (POCSO एक्ट के तहत आरोपी) और सुल्तानपुर के करौंधी कला निवासी शेर अली (हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर मामलों में बंद) के रूप में हुई है।

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गोलू अग्रहरि 14 सितंबर 2025 से और शेर अली 28 नवंबर 2024 से जेल में निरुद्ध थे। दोनों को तन्हाई बैरक में अलग-अलग रखा गया था, लेकिन उन्होंने रात करीब 2 बजे प्लान बनाकर एक्शन लिया। सूत्रों के अनुसार, कैदियों ने बैरक की खिड़की या दीवार के नीचे लगी ईंटों को रातभर में 30 से अधिक उखाड़कर छेद बनाया। इसके बाद वे बाउंड्री वॉल पर चढ़कर बाहर निकल गए। पूरी घटना CCTV में कैद होने की संभावना है, लेकिन शुरुआती जांच में लापरवाही साफ दिख रही है।

सुबह हेडकाउंट के दौरान कैदियों की गैरमौजूदगी का पता चला, जिसके बाद जेल अधीक्षक ने उच्चाधिकारियों को सूचित किया। डीजी जेल पीसी मीणा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की और वरिष्ठ जेल अधीक्षक उदय प्रताप मिश्रा, जेलर जेके यादव, डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी, एक हेड वार्डर और तीन जेल वार्डरों को निलंबित कर दिया। कुल 7 कर्मचारी सस्पेंड हुए हैं।

जेल प्रशासन ने बताया कि फरार कैदी हाई रिस्क कैटेगरी के हैं—एक POCSO और दूसरा हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों में शामिल। पुलिस ने एसओजी, डॉग स्क्वायड और कई टीमें गठित की हैं। आसपास के इलाकों में छापेमारी शुरू कर दी गई है, और फरारियों की तलाश में अलर्ट जारी है।

यह घटना यूपी की जेलों में सुरक्षा चूक की एक और मिसाल है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच जारी है और फरार कैदियों को जल्द गिरफ्तार करने का दावा किया जा रहा है। जेल में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के आदेश भी दिए गए हैं।

INPUT-ANANYA MISHRA

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