उत्तर प्रदेश के जौनपुर (Jaunpur) जिले में 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ। 28 वर्षीय डॉक्टर समीर हासिमी (Samir Hashimi) बाइक से घर लौट रहे थे, तभी पंचहटिया स्थित प्रसाद इंटरनेशनल स्कूल के पास सड़क पर लटके चीनी मांझे (कांच लगी पतंग की डोर) की चपेट में आ गए। मांझे ने उनकी गर्दन इतनी गहराई से काट दी कि काफी खून बहने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई। यह घटना मकर संक्रांति से ठीक पहले हुई है, जब पतंगबाजी बढ़ जाती है। पुलिस ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और लोगों से चीनी मांझे के इस्तेमाल से बचने की अपील की है।
हादसे की पूरी कहानी
बुधवार सुबह डॉक्टर समीर हासिमी (28), जो फिजियो थेरेपीस्ट और निजी चिकित्सक थे, केराकत कोतवाली क्षेत्र से जौनपुर मुख्यालय किसी डॉक्टर से मिलने आए थे। वापस घर लौटते समय लाइन बाजार थाना क्षेत्र के पंचहटिया गांव के पास प्रसाद इंटरनेशनल स्कूल के सामने सड़क पर अचानक चीनी मांझा उनके गले में फंस गया। मांझा इतना धारदार था कि गर्दन पर गहरी चोट लग गई और खून की तेज बहाव से वे बाइक से गिर पड़े। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। यातायात निरीक्षक सुशील मिश्र ने तुरंत उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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पुलिस की जांच और अपील
सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया और जांच शुरू कर दी। अधिकारी ने कहा कि चीनी मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन लोग ऑनलाइन मंगाकर इस्तेमाल कर रहे हैं।
पुलिस ने मकर संक्रांति से पहले लोगों से अपील की है।
- चीनी/नायलॉन मांझा बिल्कुल न इस्तेमाल करें।
- बाइक/स्कूटर सवार मफलर या गार्ड का इस्तेमाल करें।
- पतंग उड़ाते समय सुरक्षित जगह चुनें।
चीनी मांझे का बढ़ता खतरा
चीनी मांझा (कांच या रसायन से लेपित सिंथेटिक डोर) बेहद पतला और धारदार होता है, जो दूर से दिखाई नहीं देता। यह न सिर्फ बाइक सवारों, बल्कि पैदल चलने वालों, पक्षियों और जानवरों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। यूपी सहित कई राज्यों में इस पर प्रतिबंध है, लेकिन मकर संक्रांति के समय अवैध बिक्री और इस्तेमाल बढ़ जाता है। जौनपुर में पहले भी ऐसे कई हादसे हो चुके हैं, जहां शिक्षक और अन्य लोग मांझे की चपेट में आए।
परिवार सदमे में
डॉक्टर समीर के परिजन सदमे में हैं। एक युवा डॉक्टर, जो लोगों की सेवा करता था, आज इसी तरह की लापरवाही से चला गया। पूरा इलाका शोक में डूबा है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि त्योहारों में मस्ती जरूरी है, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं।

















































