UP: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में सामने आए बहुचर्चित कफ सिरप तस्करी मामले (Cough Syrup Case), में पुलिस ने लंबी जांच के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए अदालत में विस्तृत आरोपपत्र पेश कर दिया है। इस केस ने न सिर्फ राज्य बल्कि पड़ोसी राज्यों तक फैले अवैध नेटवर्क की परतें खोल दी हैं।
142 दिन की जांच के बाद चार्जशीट दाखिल
15 नवंबर 2025 को कोतवाली में दर्ज इस मामले में पुलिस ने 142 दिनों की गहन जांच के बाद करीब 39 हजार पन्नों का आरोपपत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया। यह केस औषधि निरीक्षक जुनाब अली की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसमें मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल, उसके पिता भोला प्रसाद सहित कुल 26 लोगों को नामजद किया गया।
तीन राज्यों तक फैला था तस्करी का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि यह अवैध कारोबार केवल एक जिले तक सीमित नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड तक इसका जाल फैला हुआ था। पुलिस ने इस नेटवर्क को व्यवस्थित रूप से संचालित होते पाया।
45 करोड़ की संपत्ति जब्त, 30 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तस्करी से अर्जित करीब 45 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। अब तक 30 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। एसीपी विजय प्रताप ने बताया कि अदालत में मजबूत पैरवी कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल फिर घोषित भगोड़ा
करीब 2000 करोड़ रुपये के इस बड़े मामले में मुख्य सरगना शुभम जायसवाल (Shubham Jaiswal) को अदालत ने दूसरी बार भगोड़ा घोषित किया है। पुलिस के अनुसार वह फिलहाल दुबई में छिपा हुआ है। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है और जल्द गिरफ्तारी न होने पर संपत्ति कुर्क करने की तैयारी है।
रोहनिया की कार्रवाई से खुला पूरा मामला
19 नवंबर को रोहनिया क्षेत्र के भदवर स्थित एक जिम में बनाए गए गोदाम से पुलिस ने 500 से अधिक पेटी कफ सिरप बरामद की थी। इसी छापेमारी के बाद पूरे तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
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कई अन्य आरोपी भी आए जांच के दायरे में
जांच के दौरान आजाद जायसवाल, महेश सिंह, शिवाकांत, स्वप्निल केसरी, दिनेश यादव और मनीष यादव समेत कई अन्य लोगों के नाम सामने आए। इन सभी के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है।
ऐसे कसा गया कानून का शिकंजा
पुलिस ने शुभम जायसवाल पर कार्रवाई की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई। 22 जनवरी को गैर-जमानती वारंट जारी हुआ, 24 फरवरी को कुर्की से पहले उद्घोषणा नोटिस दिया गया और 27 फरवरी को अखबारों में इश्तेहार प्रकाशित किए गए। 30 मार्च तक अदालत में पेश होने का अंतिम मौका दिया गया, लेकिन अनुपस्थित रहने पर 5 अप्रैल को कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। अब पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।
आगे की कार्रवाई जारी
पुलिस अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया को तेज कर रही है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी हैं। इस केस को प्रदेश के बड़े संगठित अपराधों में से एक माना जा रहा है।
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