UP: सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल, 40 वर्षों से कल्पवास कर रहे हैं मुस्लिम श्रद्धालु साबिर अली

UP: उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद (Farrukhabad) स्थित पांचाल घाट पर इन दिनों ‘मेला श्री रामनगरिया’ की धूम है। माघ के इस पावन महीने में जहाँ चारों ओर मंत्रोच्चार, हवन और पूजन का आध्यात्मिक माहौल है, वहीं एक ऐसी कहानी भी सामने आई है जो देश की साझी विरासत और सांप्रदायिक सौहार्द को जीवंत करती है। कायमगंज के पितोरा निवासी साबिर अली (Sabir Ali) पिछले 40 सालों से यहाँ संतों के साथ ‘राउटी’ (अस्थाई टेंट) लगाकर कल्पवास कर रहे हैं।

आध्यात्मिक यात्रा

फक्कड़ बाबा के आदेश से शुरू हुआ सफर साबिर अली की इस आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत करीब चार दशक पहले हुई थी। उन्होंने बताया कि 40 साल पहले उनकी मुलाकात एक ‘फक्कड़ बाबा’ से हुई, जिन्हें उन्होंने अपना गुरु स्वीकार किया। गुरु के आदेश पर ही उन्होंने माघ मेले में कल्पवास शुरू किया था। दो साल पहले उनके गुरु का देहांत हो गया, जिसके बाद से साबिर अली आज भी उसी स्थान पर अपनी राउटी लगाते हैं जहाँ कभी उनके गुरु रहा करते थे।

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कड़े नियमों और भक्ति से भरी दिनचर्या

साबिर अली का जीवन इन दिनों पूरी तरह से एक कल्पवासी के नियमों में ढला हुआ है। उनकी दिनचर्या बेहद अनुशासित है।

  • सुबह 5:30 – 6:00 बजे: कड़ाके की ठंड में गंगा स्नान। दिनभर, संतों के आश्रमों में जाकर सेवा करना और सत्संग में भाग लेना।
  • भोजन: भंडारे में मिलने वाला प्रसाद ग्रहण करना।
  • शाम: आरती और भागवत कथा सुनने के बाद अपनी राउटी में विश्राम।

पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ रही आस्था

आस्था का यह सिलसिला अब उनकी अगली पीढ़ियों तक भी पहुँच रहा है। साबिर अली बताते हैं कि पहले उनका बेटा इस दौरान उनके साथ समय बिताता था, और अब उनका पोता भी उनके साथ कल्पवास में शामिल होने लगा है। वे अपनी इस अटूट श्रद्धा का श्रेय ‘गंगा माँ’ की कृपा को देते हैं।

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समाज के लिए प्रेरणा

साबिर अली की इस निष्ठा की सराहना केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि मेले में आए अन्य श्रद्धालु भी कर रहे हैं। उनके पड़ोस में राउटी लगाने वाले हरदोई के वेद प्रकाश और श्रद्धालु दृगपाल सिंह का कहना है कि साबिर अली पिछले 40 वर्षों से निरंतर यहाँ आ रहे हैं और वे हम सभी के लिए आपसी भाईचारे की एक महान प्रेरणा हैं।

Input- Abhishek Gupta

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