UP: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) जिले में वृद्धावस्था पेंशन घोटाले का मामला फिर से चर्चा में है। वर्ष 2023 में सामने आए इस घोटाले में मुख्य आरोपी पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार को गैंग लीडर घोषित किया गया है। जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने गैंगस्टर एक्ट के तहत उनके और परिवार के सदस्यों की कुल 4.49 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया। यह कदम बुजुर्गों की पेंशन हड़पने वाले अपराधियों पर प्रशासन की कड़ी कार्रवाई का संकेत है।
घोटाले का तरीका और रकम की हेराफेरी
जांच में पता चला कि मार्च-जून 2023 के बीच राजेश कुमार और उनके सहयोगियों ने 2390 गरीब बुजुर्गों की पेंशन को उनके असली बैंक खातों में ट्रांसफर करने के बजाय फर्जी या अन्य खातों में डायवर्ट कर दिया। इससे लगभग 2.52 करोड़ रुपये का गबन हुआ। हर लाभार्थी को प्रति माह 1000 रुपये मिलने थे, लेकिन अधिकारी ने यह राशि हड़पकर अपने आलीशान जीवन के लिए इस्तेमाल की। जांच में कुल 4900 मामलों में अनियमितताएं सामने आईं, लेकिन मुख्य घोटाला 2390 मामलों का था।
आरोपी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई
घोटाला उजागर होने के बाद राजेश कुमार को निलंबित और फिर बर्खास्त कर दिया गया। उनके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया, जिसमें 9 से 14 लोग शामिल थे। फरवरी 2026 में जिलाधिकारी ने गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत राजेश कुमार को गिरोह का सरगना घोषित किया और उनके खिलाफ कुर्की का आदेश जारी किया। इस कार्रवाई से अन्य आरोपियों पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है।
कुर्क की गई संपत्तियों का विवरण
राजेश कुमार और उनके परिवार की कुल 4.49 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को कुर्क किया गया। इसमें महिंद्रा XUV और बोलेरो जैसी गाड़ियां, पुत्र के नाम होंडा एलिवेट ZX कार, सीतापुर जिले में कृषि भूमि, लखनऊ में पत्नी के नाम 120.817 वर्गमीटर का भवन और काकोरी परगना में एक गेस्ट हाउस शामिल हैं। ये सभी संपत्तियां अपराध से अर्जित मानी गई हैं।
घोटाले का सामाजिक प्रभाव और आगे की कार्रवाई
इस घोटाले से गरीब बुजुर्गों को महीनों तक पेंशन नहीं मिली, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई। प्रशासन का कहना है कि कुर्की के बाद अन्य आरोपियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। यह मामला सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और सख्त निगरानी की आवश्यकता को उजागर करता है। बुजुर्गों के हक को हड़पने वाले अधिकारियों के लिए अब कानून का डर और स्पष्ट संदेश है।



































