राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) 17 और 18 फरवरी को लखनऊ पहुंच रहे हैं। यह दौरा संघ के शताब्दी वर्ष (1925-2025) के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाली महत्वपूर्ण बैठकों का हिस्सा है। सूत्रों के अनुसार भागवत जी इन दो दिनों में चार प्रमुख बैठकों में शामिल होंगे, जिनमें उत्तर प्रदेश के प्रांत प्रचारक, क्षेत्र प्रचारक, विभाग प्रचारक और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक समीक्षा, शाखा विस्तार, सामाजिक समरसता अभियान और आगामी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा होगी।
17 फरवरी को लखनऊ पहुंचने के बाद शाम को पहली बैठक होगी। 18 फरवरी को दिन भर विभिन्न स्तर के कार्यकर्ताओं और प्रचारकों से संवाद और मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन बैठकों में उत्तर प्रदेश में संघ की शाखाओं की स्थिति, नए क्षेत्रों में विस्तार, युवा और महिला कार्यकर्ताओं की भागीदारी तथा सामाजिक कार्यों को और मजबूत करने की रणनीति पर फोकस रहेगा।
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इस दौरान कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं से भी उनकी अनौपचारिक मुलाकात हो सकती है। हालांकि संघ की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन लखनऊ में होने वाले दौरे को देखते हुए प्रदेश भाजपा के कुछ बड़े नेता और सांसदों से संक्षिप्त बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
संघ 2025 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इसी क्रम में देशभर में विभिन्न कार्यक्रम और बैठकों का आयोजन हो रहा है। लखनऊ दौरा भी इसी शताब्दी वर्ष की तैयारियों, उपलब्धियों की समीक्षा और आने वाले समय की कार्ययोजना बनाने का हिस्सा माना जा रहा है। भागवत जी के दौरे से उत्तर प्रदेश में संघ की गतिविधियों को नई दिशा और ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
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दो दिवसीय दौरे को देखते हुए लखनऊ पुलिस और प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी कर ली है। जहां भी बैठकें होंगी, वहां पहले से पुलिस और सुरक्षा बल तैनात रहेंगे। संघ ने भी कार्यकर्ताओं को शांतिपूर्ण और अनुशासित रहने के निर्देश दिए हैं।
डॉ. मोहन भागवत का यह दौरा उत्तर प्रदेश की सियासत में भी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह 2027 विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले हो रहा है। हालांकि संघ ने स्पष्ट किया है कि दौरा पूरी तरह संगठनात्मक है और किसी राजनीतिक गतिविधि से जुड़ा नहीं है। लखनऊ में उनके आगमन को लेकर संघ के कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है। दो दिनों में होने वाली बैठकों के बाद भागवत जी के मार्गदर्शन से संगठन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।












































