UP: प्रयागराज (Prayagraj) में एडीजे रेप एंड पोक्सो स्पेशल कोर्ट (ADJ Rape and POCSO Special Court) ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी (Mukundanand Giri) के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों पर बड़ा आदेश दिया है। एडीजे पोक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया ने दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पुलिस को तत्काल मामला दर्ज कर विवेचना शुरू करने का आदेश दिया है।
कोर्ट का आदेश और कारण
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और प्रथम दृष्टया अपराध बनते हैं। शिकायत में यौन शोषण, पोक्सो एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन और अन्य गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया जांच के लिए पर्याप्त आधार बनते हैं, इसलिए पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत दिया गया है, जिसके बाद पुलिस अब औपचारिक जांच शुरू करेगी।
मामले की पृष्ठभूमि
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी ने उसके साथ यौन शोषण किया। शिकायत में पोक्सो एक्ट के प्रावधानों का भी हवाला दिया गया है, क्योंकि मामला नाबालिग से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने कोर्ट में कहा कि जब वह शिकायत लेकर पुलिस के पास गई तो पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया, इसलिए वह कोर्ट में धारा 156(3) के तहत आवेदन लेकर आई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और जांच जरूरी है। बचाव पक्ष ने आरोपों को आधारहीन बताया और कहा कि यह धार्मिक संस्था को बदनाम करने की साजिश है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
पुलिस की कार्रवाई
कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू करनी होगी। प्रेमनगर थाना पुलिस ने बताया कि कोर्ट के आदेश की प्रति मिलते ही मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी जाएगी। पुलिस ने कहा कि मामले की गहन जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
सामाजिक और धार्मिक प्रभाव
यह मामला धार्मिक संस्थाओं और शंकराचार्य पद से जुड़ा होने के कारण काफी संवेदनशील है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं और गोरखपुर में काफी प्रभावशाली हैं। मामले के सामने आने के बाद धार्मिक संगठनों और उनके अनुयायियों में हलचल मची हुई है। वहीं दूसरी ओर पीड़ित पक्ष ने न्याय की उम्मीद जताई है।







































